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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 330, कुल 918 में से

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पृष्ठ 330
२४६कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ दूसरा अधिकरण

(१) चिकित्सकः प्रच्छन्नव्रणप्रतीकारयितारमपथ्यकारिणं च गृहस्वामी च निवेद्य गोपस्थानिकयोर्मुच्यते । अन्यथा तुल्यदोषः स्यात् ।

(२) प्रस्थितागतौ च निवेदयेत् । अन्यथा रात्रिदोषं भजेत । क्षेमरात्रुषु त्रिपणं दद्यात् ।

(३) पथिकोत्पथिकांश्च बहिरन्तश्च नगरस्य देवगृहपुण्यस्थानवनश्मशानेषु सत्रणमनिष्टोपकरणमुद्भाण्डीकृतमाविग्नमतिस्वप्नमध्वक्लान्तमपूर्वं वा गृह्णीयुः ।

(४) एवमभ्यन्तरे शून्यनिवेशायवेशनशौण्डिकौदनिकपाक्वमांसिकद्यूतपाषण्डावासेषु विचयं कुर्युः ।

(५) अग्निप्रतीकारं च ग्रीष्मे मध्यमयोरह्णश्चतुर्भागयोः । अष्टभागोऽग्निदण्डः । बहिरधिश्रयणं वा कुर्युः ।


को अपने घर ठहरा सकते हैं । जो व्यक्ति अधिक खर्चीला दीखे या अधिक शराब पीता हो, उसकी सूचना गोप अथवा स्थानिक के पास भेज देनी चाहिए ।

( १ ) जो व्यक्ति हथियार लगे अपने घावों का इलाज छिपा कर कराता है और रोग या महामारी आदि फैलाने वाले द्रव्यों का छिपे तौर से उपयोग करता है, उसका इलाज करने वाला वैद्य यदि उसके इन कार्यों की सूचना गोप या स्थानिक को दे देता है तो वह अदण्ड्य है, किन्तु यदि वह सूचना न दे तो अपराधी के समान ही उसको भी दण्ड दिया जाना चाहिए, जिस घर में ऐसे कार्य किए जाते हों उस घर का मालिक यदि गोप या स्थानिक को सूचित कर देता है तो वह क्षम्य है, अन्यथा उसको भी अपराधी के समान दण्ड दिया जाना चाहिए ।

( २ ) घर के मालिक को चाहिए कि वह घर से जाने वाले या घर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सूचना गोप को दे । अन्यथा वे लोग रात्रि में यदि किसी की चोरी आदि करें तो गृहस्वामी उसके लिए उत्तरदायी समझा जायगा । वे लोग भले ही कुछ भी अपराध न करें, किन्तु सूचना न देने के अपराध में गृहस्वामी प्रतिरात्रि तीन पण दण्ड का भागी है ।

( ३ ) व्यापारियों के वेश में बड़े-बड़े मार्गों पर घूमने वाले, ग्वाले तथा लकड़हारे के वेश में रास्ता छोड़कर जंगलों में घूमने वाले, नगर के भीतर या बाहर बने हुए मन्दिरों, तीर्थों, जंगलों या श्मशानों, कहीं भी, हथियार से घायल, हथियार तथा विष को लिये हुए, सामर्थ्य से अधिक भार उठाये हुए, डरे हुए, घबड़ाये हुए, घोर निद्रा में सोये हुए, थके हुए या इसी प्रकार का कोई अजनबी पन किये हुये, इस प्रकार के सन्दिग्ध व्यक्ति को पकड़कर नागरिक के सुपुर्द कर देना चाहिए ।

( ४ ) इसी प्रकार नगर के खंडहरों में, कल-कारखानों में, शराब की दूकानों में, होटलों में, मांस बेचने वाली दूकानों में, जुआघरों में, पाखंडियों के अड्डों में कोई सन्दिग्ध व्यक्ति दिखाई दे तो, गुप्तचर उसको पकड़ कर नागरिक को सौंप दें ।

( ५ ) गर्मी की ऋतु में मध्याह्न के चार भागों में आग जलाने की मनाही कर