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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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पृष्ठ 58

२६ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।
कुलिजम् । ७॥ त्रिहायिण्या वत्सतर्याः शुक्तानि पिशिता-
न्याशयति ॥८॥ भक्तं सुरां प्रपां सम्पातवतूकरोति ॥९॥
पूर्वस्य ममाग्ने वर्च इति वर्चस्यानि ॥१०॥ औदुम्बर्यादीनि
त्रीणि ॥ ११ ॥ कुमार्या दक्षिणमूरुमभिमन्त्रयते ॥१२॥
वपां जुहोति ॥ १३॥ अग्निमुपतिष्ठते ॥ १४ ॥ प्रातरग्निं
गिरावरगराटे षु दिवस्पृथिव्या इति दधिमध्वाशयति
॥१५॥ कीलालमिश्रं क्षत्रियं कीलालमितरान् ॥१६॥३।१२॥
हस्तिवर्चसमिति हस्तिनम्। १॥हास्तिदन्तंबध्नाति।२।
लोमानि जतुना संदिह्य जातरूपेणापिधाप्य ॥३॥ सिंहे
व्याघ्रे यशो हविरिति स्नातकसिंहव्याघ्रबस्तकृष्णवृषभराजां
नाभिलोमानि॥४॥दशानां शान्तवृक्षाणां शकलानि॥५॥
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