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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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११८ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।
स्यति ॥२८॥ स्फोटत्सु स्तुतः ॥२९॥ पश्चादग्नेः कर्ष्यां
कूर्चुपस्तोर्णायां द्वादशरात्रमपर्यावर्तमानः शयीत ॥३०॥
तत उत्थाय त्रिरह उदवज्रान्प्रहरति ॥३१॥ नद्या अनाम-
सम्पन्नाया अश्मानं प्रास्यति ॥३२॥ उष्णेऽक्षतसक्तून्-
नूपमथिताननुच्छ्रसन्पिवति ॥३३॥ कथं त्रींस्त्रीन्काशीं-
स्त्रिरात्रम् ॥३४॥ द्वौ द्वौ त्रिरात्रम् ॥३५॥ एकैकं षड्-
रात्रम् ॥३६॥ द्वादश्याः प्रातः क्षीरौदनं भोजयित्वोच्छि-
ष्टानुच्छिष्टं बहुमत्स्ये प्रकिरति ॥३७॥ सन्धावत्सु स्तुतः ॥
॥३८॥ लोहितशिरसं कृकलासममूनू हन्मीति हत्वा सद्यः
कार्यो भाङ्गे शयने ॥३९॥ लोहितालङ्कृतं कृष्णव