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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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पृष्ठ 126

९४ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।
चक्ररयं प्रतिसरो यां कल्पयन्तोति महाशान्तिमावपते॥७॥
निष्ट्यवमुच्योष्णीष्यग्रतः प्रोक्षन्व्रजति ॥८॥ यतायै यतायै
शान्तायै शान्तायै शान्तिवायै भद्रायै भद्रावति स्योनायै
शग्मायै शिवायै सुमङ्गलि प्रजावति सुसीमेऽहं वामा-
भूरिति ॥ ९ ॥ अभावादपविध्यति ॥१०॥ कृत्यामित्र-
चक्षुषा समीक्षन् कृतव्यधनीत्यवलिसं कृत्यया विध्यति
॥११॥ उक्तावलेखनीम् ॥१२॥ दूष्या दूषिरसीति दर्व्या
त्रिः सारूपवत्सेनापोदकेन मथितेन गुल्फान् परिषिञ्चति
॥१३ ॥ शकलेनावसिच्य यूषपिशितान्याशयति ॥१४॥
यष्टिभिश्चर्म पिनह्य प्रैषकृत्परिक्रम्य बन्धान्मुञ्चति
पात्र में चिति आदि का आधान करे मंत्रोक्त क्रिया में—