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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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पृष्ठ 118

८६ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।
खनामीति सौवर्चलमोषधिवच्छुक्लप्रसूनं शिरस्युपचृत्य
ग्रामं प्रविशति ॥१२॥ रथजितामिति माषस्मराग्निवपति
॥१३॥ शरभृष्टीरादीप्ताः प्रतिदिशमभ्रू स्यन्त्येवार्च्या आव-
लेखन्याः ॥१४॥ भगमस्या वर्च इति मालानिष्प्रमन्ददन्त-
धावनकेशमीशानहताया अनुस्तरणया वा कोशमुलू-
खलदरणे त्रिशिले निखनति ॥१५॥ मालामुपमध्या-
न्वाह ॥१६॥ त्रीणि केशमण्डलानि कृष्णसूत्रेण विग्रथ्य
त्रिशिलेऽश्मोत्तराणि व्यत्यासम् ॥ १७ ॥ अथास्यै भग-
मुत्खनति यं ते भगं निचख्नुस्त्रिशिले यं चतुःशिले ।
इदं तमुत्खनामि प्रजया च धनेन चेति ॥१८॥ इमां खना-
मीति बाणापर्णी लोहिताजायादध्नेन संनीय शयनमनु
से सौ