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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 361 में से

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पृष्ठ 108

७६ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् ।
मिति वैणवेन दार्भ्यूषेण कृष्णोर्णाज्येन कालबुन्दैः स्तुका-
ग्रैरिति मन्त्रोक्तम् ॥८॥ चतुर्थ्याभिनिधायाभिविध्यति
॥९॥ ज्यास्तुकाज्वालेन ॥१०॥ यः कीकसा इति पिशील-
वीणातन्त्रीं बध्नाति ॥११॥ तन्त्र्या क्षितिकाम् ॥ १२॥
वीरिणवध्री स्वयंम्लानं त्रिः समस्य ॥१३॥ अप्सु त इति
वहन्त्योर्मध्ये विमिते पिञ्जुलीभिराप्लावयति ॥ १४ ॥
अवसिञ्चति ॥१५॥ उष्णाः सम्पातवतीरसम्पाताः ॥१६॥
नमो रुरायेति शकुनीनिवेषीकाङ्घ्रिमण्डूकं नीललोहिता-
भ्यां सूत्राभ्यां सकक्षं बद्ध्वा ॥१७॥ शीर्षक्तिमित्यभिमृ-
जोंक की दवायें कही गई जानो ॥ ७ ॥ फिर गण्डमाला की दवा को
कहते हैं । “अपचितां०” इन दो एवं “आसुस्रसः” इस एक, इन तीन
ऋचाओं से बांस के धनुष को काले रंग के भेड़के दुम की ज्या बनाकर
चित्रित शर से गण्डमाला को प्रत्येक ऋचा से विद्ध करे । तीन ऋचायें
हैं एवं तीन ही शर हैं । चौथी ऋचा-“या ग्रैव्या अपचित०” से गण्ड-
माला पर धरकर विद्ध करे और अवसिंचन करे ॥ ८ ॥ ९ ॥ काले रंग
के भेड़े के स्तुकाग्रको जलाकर उसपर जलको गरम करके उससे उषः-
काल में रोगी को अवसिंचन करे ॥ १० ॥ अब राजयक्ष्मा रोग के भैष-
ज्य को कहते हैं। “यः कीकसार्क०” इन तीन ऋचाओं से वीणातंत्री खण्ड
को डालकर अभिमंत्रण करके बान्धे ॥ ११॥ वीणा के गस्वर को विष्णो
वाद्य वीणाकंठ शिखण्ड को वीणा तंत्री बांधकर भूमि पर डालकर अभि-
मंत्रण करके बान्धे ॥ १२ ॥ स्वयं पतित वीरिण के खण्डों को एकत्र बांध
कर डालकर अभिमंत्रण कर बान्धे ॥ १३ ॥ जलोदर रोग जो वरुण से
पकड़ा गया हो उसकी दवा । “अप्सु त०” से दो बहती नदियों के संगम
पर घर बनाकर रोगी को संगम के जल से नहवाया करे ॥ १४ ॥ या
उस जल से अवसिंचन करे ॥ १५ ॥ जिसको रोगी पर डाले वह गरम
जल होना चाहिये । और जो असम्पात जल हो शीतल होना चाहिये
जिससे आसिंचन करे ॥ १६ ॥ “नमो रुराय०” ( तक्म नाशन गण )
इन दो सूक्तों से रोगी को खाट पर कर देवे और उसके नीचे हरे सूत
से रोगी के बांये जंघा में बान्धे । बाण की भाँति रेखा को इषीका कहते