कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)
महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा
स्रोत: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (उद्गम)
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कथापीठ नामक प्रथम लम्बक १-११७
प्रथम तरंग १-११
मंगलाचरण ३ प्रस्तावना ३ शिव और पार्वती का संवाद ५ पार्वती के पूर्वजन्म की संक्षिप्त
कथा ७ पार्वती का प्रणय-कोप ९ पुनः कथा का उपक्रम ९ पुष्पदन्त और माल्यवान
को पार्वती का शाप ११ शापान्त की घोषणा ११।
द्वितीय तरंग १२-२५
वररुचि (पुष्पदन्त) की कथा १३ वररुचि की जन्म कथा १७ व्याडि की कथा १९
वर्ष का चरित्र १९।
तृतीय तरंग २५-३५
पाटलिपुत्र के निर्माण की कथा २५ राजा ब्रह्मदत्त की कथा २९।
चतुर्थ तरंग ३७-५५
उपकोशा की कथा ३७ पाणिनि की कथा ३९ उपकोशा की कथा (चालू) ४१ वररुचि
का प्रत्यागमन ४९।
पंचम तरंग ५५-७३
वररुचि की कथा (चालू) वररुचि का वैराग्य ५५ राजा योगनन्द का अन्तःपुर : मरी
मछली का हँसना ५७ सुन्दर कौन ? ६१ राजा आदित्यवर्मा और मंत्री शिववर्मा की
कथा ६३ मित्रद्रोह का फल ६५ वररुचि का वैराग्य और महाप्रस्थान ६९ काणभूष की
कथा ६९ शाकाहारी मुनि की कथा ७२।
षष्ठ तरंग ७५-९७
गुणाढ्य की कथा ७५ चूहे से धनी बने सेठ की कथा ७७ मूर्ख सामवेदी ब्राह्मण की
कथा ८१ देवी-उद्यान की कथा ८३ राजा सातवाहन की कथा ८७।
सप्तम तरंग ९७-११३
शिवशर्मा की कथा ९७ पुष्पदन्त की पूर्वकथा १०३ राजा शिबिकी कथा १०९ माल्य
वान की पूर्वकथा १११।
अष्टम तरंग ११३-११७