काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)
Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras
आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा
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इस ग्रन्थ के बारे में
काशिका पाणिनि की अष्टाध्यायी पर लिखी गई वह वृत्ति है जो सूत्रों के मूल क्रम का पालन करते हुए प्रत्येक सूत्र का अर्थ, उदाहरण और प्रत्युदाहरण देती है। इसके रचयिता वामन और जयादित्य माने जाते हैं और यह प्रायः सातवीं शताब्दी की रचना मानी जाती है। ग्रन्थ के आरम्भिक श्लोक में ही कहा गया है कि वृत्तियों, महाभाष्य और धातु-पारायण, नाम-पारायण आदि में बिखरे हुए व्याकरण-शास्त्र का यह सार-संग्रह है। पाणिनीय व्याकरण को सूत्र-क्रम से पढ़ने वालों के लिए आज भी यह सबसे उपयोगी प्राचीन वृत्ति है।
यह स्कैन बनारस के राजकीय संस्कृत कॉलेज में धर्मशास्त्र के अध्यापक पण्डित बालशास्त्री (रानडे) द्वारा परिशोधित संस्करण का है, जो काशी के मेडिकल हॉल प्रेस से छपा। उपलब्ध प्रति १८९८ का द्वितीय संस्करण है और केन्द्रीय पुरातत्त्व पुस्तकालय, नई दिल्ली से आई है।
संस्कृत भूमिका में बताया गया है कि भट्टोजि दीक्षित की सिद्धान्तकौमुदी के प्रचार से पहले पूरे भारत में काशिका का खूब पठन-पाठन होता था, पर बाद में कौमुदी के सरल क्रम के कारण यह इतनी उपेक्षित हो गई कि काशी के पुस्तकालयों में भी इसकी कोई पूर्ण प्रति मिलना कठिन था। भूमिका इसके रचयिताओं और उनके मत पर भी चर्चा करती है। इसके बाद माहेश्वर सूत्रों से आरम्भ होकर पूरी वृत्ति संस्कृत में दी गई है; इस संस्करण में हिन्दी अनुवाद नहीं है।
Cel-
N2/2/76
Central Archaeological Library,
NEW DELHI.
27200
Call No. Sa 4V/ V.J/ Bal.
Author— Vamana and Jaya-
ditya.
Title— Kasika; A Commentary
of Panini's Grammatical
Aphorisms.
| Borrower No. | Date of Issue | Date of Return |