कर्पूरमञ्जरी (महाकवि राजशेखर - प्राकृत सट्टक एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Karpuramanjari Sattaka of Rajasekhara with Commentary
महाकवि राजशेखर द्वारा
३
(वाम-स्तम्भः / Left Column)
अ० श्लो०
फ
फुल्लुअरं कप्परुक्खमं १ १९
ब
बालरई कड्डामो १ ९
बालाओ होंति २ ४१
बालो वि कुरयअवरू २ ४५
बिंधोहे बहुलं ण देंति १ १३
भ
भद्दं होउ सरसमहं १ १
भाउ ! कहिज्जदु १ ५
भुअगजबद्धदामा • ४ १९
भूगोले निमिराणुपधमन्त्रिणे ३ २५
म
मंदारं मपहरस्स २ ३३
मत्तो ण रत्तो ण अ १ २२
मज्झिट्ठी ओहमुरो २ ४१
मज्झणगणहधगधगन्त० ४ ७
मज्झण्णे गिरिग्गहपंचकल ४ ३
मज्झा हत्थिट्ठिप्राणिउड्डया ३ २३
मण्णे मद्धो णिवडियत्तिअं १ १०
मरगममेइँरजुअं चरणा २ १४
मरगमणिगुण्ड ३ २
मा कहिं पि ३ ३२
माएं मुंचध देह पहलन्नं १ १८
मुहकंज् हरिणंक २ १४
मुत्ति भरंति हरिवच्छमुहा १ २४
मुड्डाण णाम हिम्भाइ २ ३६
मूण्णादेवी पहुदव्वहुक्कंदगूंरं २ २
मोत्ताहलिलाहरगुच्चभाम्रो ४ ९
मोणूअ मण्णा ४ १५
(दक्षिण-स्तम्भः / Right Column)
अ० श्लो०
र
रंदा चंदा दिक्किवदा १ २३
रणेत्रमणिणेउर २ ३२
राअसु अपिच्छणीलं २ १४
रूवेण मुद्धा वि णिभूमअंति १ ३१
ल
लंखातोरणमालिआलरडिगो १ १०
लत्तवणे णरणेसरं चयणणिहं १ ३२
लीलुत्तंसो सिरीअं ४ ६
लोमार्ण लोअणेहिं २ ५०
व
विद्धाअंतो २ २०
विग्र ह्म वियकेंदली १ २०
स
संबुद्धपत्तगणोलि० २ ३६
सण्णो चंदु समग्गारे ४ २२
समणिवलअंकंचीणेउरा ३ १८
समासमीमा ४ ११
समहररइभमरट्टो ३ १०
सणिहट्टर्महणाय १ ३
सह दिवराणमाहिं २ ९
सुविअअमेक्कपगत्थं ३ ८
सो भस्स बहुं १ १०
सो रट्ठओ त्ति १ ६
संवंचमवंगिणो ४ ५
ह
हंसि कुंकुमरेहविज्जिअत्तणु २ ८
हत्थे महासंबवधीपराओ ४ १४
[हिंदोल---] २ १५
बालभारतश्लोकानां सूची ।
अ० श्लो० | अ० श्लो०
अनूचानो हि यद्ब्रूते सा १ १० | क्षत्रैकत्रासचिन्ताकुलमनसि २ ४१
अम्बाचुम्बितपल्लवानां य० २ ३९ | गान्धाराधिपतेः पुत्रः सुव० १ ४३
अयमहमिह विप्र. प्रोत १ ८७ | चापं प्रति त्रिचतुराणि प० १ ४१
अयमहिरुचिर्भजन्नतीचीं १ २१ | द्योतच्चूडामणीनां चलन० २ ४८
अस्मिन्महासदसि कौरव० २ ४३ | जातं पौकसभङ्गतः शक० १ ७०
अस्य वैष्णवमिदं महाधनुः १ ६९ | जैत्रं तन्त्रं कुसुमधनुषः... १ ७९
अस्मासमं समरकर्म विट १ ६८ | ज्येष्ठस्यापाण्डुपुत्रस्य एत० २ ३५
अस्याह्वये दलितदाडिम० १ ४७ | शणज्झणितकिङ्किणीमुखरकं २ २०
आरूणांशितचापमण्डल० १ ७८ | तत्रोत्सर्पिणि राजसूयसमये २ ८
अहार्य्यं कौरवकुमारबलं २ ४७ | तरलाय दृशौ मनाक्स्थगय १ २१
आ देवादिव्यपङ्केरुहसदन० २ १ | तस्यैष शम्बरमहासुरसु... १ ५९
आद्यः कन्दो वेदविद्याल० १ ३ | दक्षिणं करमुपैति वामतो १ ६६
आपत्प्रार्तिहरः पराश्रमथनः १ ११ | दम्तोलग्रलिभिः शिरोम्बि० १ १९
आर्यो येसि निजो न विक्र० १ २३ | दुःशलागुणगणेन रञ्जितो... १ ४८
उत्पाटितमहाताल. कृक्ष० १ ८६ | दुर्नामं यदि मुरारिशार्ङ्गकं १ २४
उद्यतः प्रनुशानुजन्मनः १ ६० | दुर्नामं दहनमंभवं धनुः ... १ ३९
एतत्कृष्णस्य शास्त्रं मनु ... १ ७१ | दुर्योधनो भूपकिरीटवि० ... १ ४९
एष मे कचकर्षणावविभवः २ ५० | दुर्योधनो मन्युमयो महा० २ ६
ऐलः प्राप्त पुरुरवाः प्रभु० २ २३ | दूतोदधिमरीचिरत्नपचनापि १ ३८
कण्ठे मौक्तिकदाम गण्डत० १ २० | देवश्चन्द्रपुलस्तनापतनिलयः २ १०
कर्णप्रायरणं सहकचरणा० २ २९ | देवस्य शुभ्रशे. कुले मुव० १ ८५
कस्य द्रोणो धनुषि न गुरुः १ ८३ | दोर्दण्डमण्डिताशेषदृश० १
किं धात्रिभिः शिशुर्गुरुः २ २३ | द्यूतं क्षत्रकुलान्तके न स . २ ४३
किं किं किं शु शु शुम्भने० १ ५२ | द्रोणादुपार्जितधनुर्गम० ३ ५३
कुर्वन्तो नवमौरपाङ्गतटितै० २ १७ | द्रौपदी . १ ४२
| अ० | श्लो० | अ० | श्लो० | |
|---|---|---|---|---|
| कृत्ये जगत्त्रतां न मेदिनी | १ | ७७ | यः पीयूषभुजां पुरः प्रह० | १ |
| धनुर्विद्यारहस्येषु शिष्योऽयं | १ | ६१ | यः सत्त्वस्य निधिः श्रियां | १ |
| धर्मे चार्थे च कामे च मोक्षे | १ | १८ | यदुत्सिमुदामुद्द्र्धैर्यायी | १ |
| धार्ते द्रुपदजाम्बरं | १ | ४५ | यद्यहं हारिता पूर्वं भवामि | २ |
| दृष्ट्वा पुत्रं विपण्णे हसति सु० | १ | ७३ | यन्मुक्तः स्फारतारध्वनि० | २ |
| ध्रुवमिदमुरदिष्टं कैश्चिदा० | १ | ८० | यस्मिन्मदस्य मदनस्य ... | १ |
| नकुलोऽपि ते भ्रातृभ्रांता | २ | ३२ | यागकुण्डशिरिगर्भसंभवं | १ |
| नमत्कण्ठपाडनत्रुटितकीक० | १ | ५२ | यात्राहूतोऽद्य चतुरहच० | १ |
| नमः शिवाय संसारसरो ० | १ | १ | यां मे यलः स वलवान्दलि | २ |
| मित्रमुकुटमौलिः पाकलो० | १ | ७ | यावन्नैकं द्रुपददुहितुः कृ० | २ |
| नाले शीर्यन्महोत्पलस्य धि० | २ | १९ | युधिष्ठिरो धर्ममयो महा० | २ |
| निरर्गलविनिर्गलत्तुलगुलाक | २ | ३९ | येनेयं याज्ञसेनी नृपसदसि | २ |
| निर्दिशन्तु निजबाहुविक्रमं | १ | ५१ | ये विद्यापरमेश्वराः स्तुव० | १ |
| निर्वद्धान्नरजीवपिण्डकरणै | १ | २३ | ये सीमन्तितवाग्रभसराज | १ |
| निर्वान्ति यस्य वदनाद्दि० | २ | २५ | योगीन्द्रश्छन्दसां द्रष्टा रा० | १ |
| नीलाम्बरं नलिनदाम च | १ | ५३ | यो भार्गवाद्भगवतोऽर्जित | २ |
| न्यस्तं सान्द्रवितुषु चक्षुर० | १ | ३६ | यो मन्थानकरः शमी निज० | २ |
| न्यायवादी विकर्णोऽत्र | २ | ४४ | यौवराज्याभिषेकार्हो वीरो | १ |
| पञ्चानां या कलत्रं द्रुपदम० | २ | १७ | रणन्मणिनूपुरा रणरजश्छ० | २ |
| पाणिप्रस्थंयंकुलसुमनःसौरभं | १ | ६५ | राजन्युधिष्ठिर नराधिप ... | २ |
| पादो यासम्वि सान्द्रकुङ्कुम० | १ | ५० | राजशेखरकवेर्महात्मनो | १ |
| प्रथयति पात्रविशेषगतामा० | १ | १४ | राजगूयक्रतोर्यज्वा पाण्डवो | २ |
| प्रसर्पतु रणाङ्गणे रुधिरवेदि | १ | ८९ | राजसूयक्रतोर्यज्वा पाण्डु | २ |
| बभूव यस्मीन्नभयः पुरा | १ | १२ | राजावतीक्ष्णमायानो राज० | २ |
| महाभ्यः शिवमस्तु वस्तु | १ | रे रे माहाण मुञ्च विस्रवम | १ | |
| महाद्युष्ययुगपन्नितमातत | १ | ७६ | रेवती त्रिभुवनैकमन्दरी न | १ |
| मतीधरापराशु ये मनिनदं | १ | २१ | लक्ष्मी संवननैर्भुजैर्नृपतयः | १ |
| मायामये मयसभाधिमन्ते | २ | ९ | वर्षाणि द्वादशारण्ये मह | २ |
| वंशद्याणगुणैर्णांकरणग्रहमु० | १ |
६
अ० श्लो० | अ० श्लो०
वाच्यं यन्न दुरुक्तयः कुच० २ २ | सत्यसंघो जरासंधः क्रान्त० १ ६७
विनायको यः शिवयोरप० १ २० | सदाशिवप्रशिष्योऽयमवधिः १ ३६
विवर्तयाक्षान्शकुने शार० २ १२ | संभूता द्रुपदा घरे हुतभुजः २ १४
वीर्यं वचसि विप्राणां क्ष० १ ८८ | सर्वे कार्मुककर्मठाः शिति० १ ३४
वृषतुरगकरीन्द्रस्यन्दनाद्या० १ ५६ | सायकश्च त्वया मुक्तो यद्यं १ ८१
वैकुण्ठकार्मुकहताक्रमणे० १ ७२ | सा शुक्तिर्मधुपानकेलिचप १ ८
व्यासो वैखानसवृषा सत्यः १ ४ | सिन्धुयन्त्रितयात्रोऽयं सि १ ४६
व्रीडानतेषु वदनेषु च ... १ ७४ | सुधावीचीमुचां वाग्भिर्वि० २ १८
शंभोर्मूर्ध्नि गतागतानि कुरुते १ ३५ | सौहार्दोर्मिणियाऽयं प्रेधितमतः २ ३१
शारीद्यूतकलाकूतूहलि मन० १ २९ | स्मितपरिचयादृत्तिर्वांचा १ ३०
शिशुपालमहीपालो मेक० १ ६४ | स्वहत्यापस्तम्य तुभ्यं त्वमसि १ २५
शिष्योऽस्मि भार्गवमुनेः १ १७ | हेहो दृप्त कृतास्त्र दानस० २ १५
श्रियः प्रसूते विपदो रुणद्धि १ ९ | हरचूडामणिरिन्दुबिज्जगरी० १ १३
श्वानिर्वासनडिण्डिमो घन० २ ४ | हा मद्धं शकुनेः कुलक्षयकरं १ ७१
श्रोणीबन्धस्त्यजति तनुतां १ २८ | हारोऽयं केलरखीविहसित० २ १५
सकलभुवनरक्षाग्रक्षतन्द्रा . १ ३२ | हे द्रौपदि त्वमसि कात्र २ ४१
संसर्पणात्सिजतनुज्वलकी० २ २८ | हेलानमन्नृपकिरीटविटङ्क २ १६
संघट्टोरिपटच्चूड़ाच्युतमणि १ ८४ | हेलालोडितपाण्डवेवरलव० २ २३
B.L.-17
BHAVANS LIBRARY
Mumbai-400 007. Ph.: 3634462/63 Ext.: 226
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Date | Date | Date
-13 DEC 2007