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कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 354 में से

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डदे"!
Wait! Look at Line 5:
"राजा महोदरा संयती... बालबीम मीरी २। मरी भीर चिप या नि रुकसी नमः खा करेश..."
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"...चालते चव्यान सीह की आज राहि गोपफाण लाना ल..."
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"...मुगट तलांट गाय फर..."
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"...माधव..." -> "माधव वउनी वागवी माहना फमूहनी..." -> माधव ब्राह्मण! Madhava Vyasa/Brahmana!
"माधव वउली वागवी माहनाफ मूहनी..." -> "माधव" is Madhava who went to Delhi to invite Alauddin!
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"...अनेक बंध जय जय जय सबद्द..."
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"...अलपखां संभार/धनुष नाव संध करा..." -> "अलपखां" (Alap Khan)!!
Yes! "अलपखां संभार धनुष बाण संध करा"!
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"अलपखां संभार/धनुष बाण संध करा/बाण तथा रीशीर मी मूरा याउ..."
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"आसीरशी अनि का मां पीधा के वकिवाजी नाना बोल मूर गर करिपु बडी जगजल का होना उपरिय"
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"...४२ [जिंत