कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३४ कान्हडदे प्रबन्ध
असपतिदल नवि लाभइ पार, पाषलि फिरतां कोस अढार ।
पातसाही दल दीठउं जिसइ, राउलि गढ सिणगारिउ तिसइ ॥१४९
पट्टकूल मेघवन्नां कसां, कोठइ कोठइ बिमणां धस्यां ।
रतनजडित चंद्रुआ थिकां, दीसइ मोतीनां झूंबणां ॥ १५०
ऊपरि वली त्रिकलसां घणां, झकलत दीसइ सोना तणां ।
तारा तणां किरणसूं मिलइ, कोसीसे दीवा झलहलइ ॥ १५१
गीत गान सांभलीइ घणां, कोठइ कोठइ हुइ पेपणां ।
को वर्णवी न जाणइ मान, जेहवुं इंद्र तणउं विमानं ॥ १५२
॥ राग अंदोला धन्यासी ॥
लंक त्रिकूट सिरीपडउ रे, गोरीअडे गढ दीठ ।
कनकसोकमल फूदडी ए, विचि विचि रतन चईठ ॥ १५३
१४९ असपति-असपतिनां B. नवि-न B. लाभइ-लाभि B C J, लभि H. पाषलि-पाषलें D, पाषल L.
फिरतां-फिरता C H L, फरतां D. कोस-क्रोश C. पातसाही-पातसाहि A, पाटसाह हें H, पातशाह J,
पातिसाह K, पातिसाही L. दीठउं-दीठूं B J, दीठां C, दीढुं D K, दीठउ H L. जिसइ-जिसिह B J, जिसि C,
जिसई D, जसइइं H. राउलि-राउल H J L. सिणगारिउ-सिंगारह B, सगगारिउ C, सिणगाखु D, शणगारिउ
J, सिगगार्याउ K, सिनिगारिउ L. तिसइ-तिसिह B, तिसि C J, तसिइ H, सतिसेइ L.
१५० पट्टकूल-पटफूल D H L. मेघवन्नां-मेधवनां B D J, मेघवन्जा C, मेघवंता H, मेघवंनो K, मेघवंना
L. कसां-सरियां B J, कस्या C K, वरिया H, धस्या L. कोठइ कोठइ-कोठि २ B, कोठे २ C L, कोठिइं २ D,
कोठकोठि H, कोठि कोठि J. बिमणां-साहमा B, विमणा C K, बमणां D, बइसणो I₁, भमणा L. धस्यां-
धरिया B J, धस्या C K L, कर्या I₁. रतनजडित-रत्नवटितं B, रतनजडित C H, रतनजटित J, रंजजडति
L. चंद्रुआ-चिहुं पासिं B, चंद्रूया C, चेडुआ D, चद्रुआ L. थिकां-थिका A, यका C H L, जक्यां J.
दीसइ-दीसई A D, दीसि B C H J. मोतीनां-मोतीना H, मोती J. झूंबणां-झूषणां A B, झलका C L, झेव-
रकां D, झबका H, झूभण पड्या J.
१५१ त्रिकलसां-त्रिकलसा C L. घणां-घगा C L. झकलत-झलकति B K. दीसइ-दीसि B C H J.
सोना-सोनां B D K. तणां-तणा C, घणा K. तारा-सूर्य K. तणां-तणा C H, तने J. किरणसूं-किरणस्यूं
B D, किरणसुं C, करणसुव H, किरणांशू J, किरणासु K. मिलइ-मिलिह B, मिलि C J, मलि H. कोसीसे-छोछीसि
B. दीवा-दीवा K. झलहलइ-झलहलिह B, झलहलि H J. ii-iv qrs in L are: दामि २ हुइ पेपणं ।
कोसीसे ते दीवा बलइ । ऊपरि थकी ध्वजा उछलइ ॥
१५२ गान-गांन A B D H J K. सांभलीइ-सांभलीइं D, साभालियइ K. कोठइ कोठइ-कोष्ठ २ A,
दोठि २ B D, कोठे २ C, कोठि कोठि H J. हुइ-हुई B, नितु हुइ C, हुइं D, होइ J, हइ K. को-कोइ D,
कवि J. वर्णवी-वर्णवा B, वर्णवावी J. जाणइ-जाणि B J, जोगि C H, जाणइ D K. मान-सांन D H J.
जेहवुं-जेहुं A, जेहवू H, जेहवूं J, जेहवड हूइ K. इंद्र-इद्र H K. तणउं-तर्णू B J, तणं C D, तणू H, तणउ
K. विमानं-विमान A D H J. L omits 152 a (cf ii qr of vs 151 in L), and reads as
152 b. सो वर्णवान न जाणइ मान । जेहवडं इंद्र तणउे विमान ॥. H interpolates the follow-
ing line after vs 152: जसिस मेरुउ पह कैलास देव इंद्रनु जिसिउ निवास ।
१५३ राग-गीत । राग A B J K. अंदोला-धवल H, अंदोला J, अशोल K. धन्यासी-...J, धन्यासी ऊपरि
अंदोला गीत L. लंक-लंकि B. त्रिकूट-त्रिरे B, त्रकूट H. सिरीपडउ-शिरीपडउ A, सरीपडु B D, सरीपदा E