कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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१२६ कान्हडदे प्रबन्ध
नासीनइ ऊगारिउ आप, लोह तणइ भइ वीहइ वाप।
तव लाजिउ महिपउ देवडउ, किम सांसहइ बोल एवडउ ॥ ११५
तउ महिपइ मोकलाव्या राय, चढीउ कटक राडद्रहे जाइ।
मलिक सरूप विहुं सइ साथि, महिपइ हणिउ आपणइ हाथि ॥ ११६
महिया साथि पड्या पचास, तेह हूव अमरापुरि वास।
हियइ रोस पातसाहि धरिउ, गढ जालहुर भणी सांचरिउ ॥ ११७
जास तणउं सीताई नाम, आगलि ऊभी करइ सिलाम।
जाती समरण काकरुत लहूं, शुकन सरूप विमासी कहूं ॥ ११८
११५ L omits i qr. नइ-नि B C J, नई D. ऊगारिउ-उगासूं A, ऊगारिउ B, उगाव्या D,
ऊगरिउ H, उगरशू J, ऊगराउ K. लोह-लोही J, हीया L. तणइ-तणि B C, तणे J K