कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें: द्वितीय खंड ८१
लाप, विचारि वाणिजू चालइ, चार लाप.उलगाणा।
करकटीया हवसी भाथाइत, फरसीधर सपराणा ॥ ९२
दल चालंतां धरणी कांपइ, सेप न झालइ भार ।
सायर तणां पूर ऊलटीयां, जेहवां रेलणहार ॥ ९३
९२ विचारि-विचारि D, विचार H, विचार K. वाणिजू-वाणज् A, वाणजू B, बाहिदि C, बाहिणि D,
वाणिजू J K. चालइ-चालई A, चालिइ B, चालि D H J. C transp as चालि बाहिडि. चार लाप-
बार सहस C J, साठि लाप H, असी लाप K. उलगाणा-उणगांणा A, उलगाना B H J, उलगांण C K,
उलगाणां D. करकटीया-कटकटीया D, करकटीआ H, ककडा K. भाथाइत-भाथायत C, भयाइत D, भथायत
H J, अनइ भयाइत K. फरसीधर-फरसी बहइ A, फरसी धरइ K. सपराणा-सपराणा A C H K, सपरांणां D.
After vs 92 H interpolates the foll vss:
: अमीर मलिक सवि एणी परि बोलि चलु मेरै भाय । पातसाहा संपै काम बहुतेरे चलू कटकीइ जाइ ॥
सबदवेध सीधूआ बोल्यु कनोजा करवाणी । जस देषि गहू थरहरि धूजि इम बोलीइ सूरताणी ॥
हबसी पतन नेजा बाजो टोप धरि सो रोगी । कावरचीनर काविल आया धग हूयीआरे रोगी ॥
पलकपहरि काबली आया मोटा मोगर साधि । टूकडे टूकडे पाछै न मुडइ घाउ दीइ बहू भाथि ॥
इंदू बीहू इणि परि बोलि बोलावु मीर साजी । बही फोज ता तीस्रही बहीइ भला रेवंत छइ ताजी ॥
ताजू राजू छोग छेगाला मीर अबूजी साथी । तरफस बंधी पीर जी कहीइ माहि महिमूदीआं भाथी ॥
अंगा रंगाउलि टाटर टोपी जीवरपी सनाह । बगतार पहिरि बघन आया बयरीआके सिर घाउ ॥
भाते बंधि चमरज सोहि मांक्रीइ मुठालु । करटी आपि बराह न दीसि असवारी वेढालु ॥
पारकरी संधुआ कहीजि पुरखाणी केकीँण । महुडा नील अनि माकडा सवार ताजी सपरांण ॥
टूके काने भूगरमेला ते कायरा किहाडा होइ । मरुडद अतिहि पतंगीआ चे पहुला चंचल सोइ ॥
कालुआ कीसोरा कहीजि ताजी वंभा हंसार । रेवंत दीप्ति रलीआंमणा मन्या सब न पार ॥
अलची घलची अनंइ कनोज़ा सरब दीसि मीर सादी । बाथी बाहणि जे कुडी मन्या पंचाइण वारी ॥
पल्थी पत्र बडु घलझ्लीइ भञ्जवलि बाधु ठाठ । पहली फोज आपणी चलाउ जे जाल्हरनी वाटि ॥
ताम्र सुन्नुं मस अनि तिलवट्ट सावरीन मीर छूटउ ॥
बिमणां झूझ अणि आगला भिमता दीखि मुगला । रोगी हबसी सीश रान भीर मलिक नि फोजा धांन ॥
षाइ मागि मद पीइ सलार आपआपणु न जांणि पार । षोली गयर बबर पारसी नेजा झपकि जिम आरषी ॥
घोडां माथां चित्रा पाय जागे वन माहि घुय्या बाघ । जायी गडडन नानी अपि गगनि भ्रमता भारि पंषि ॥
नाधि तीर त्रेस भुंइ बहि तेहनि मुपि कुण उभु रहि । जरहिजीग पूरा सुजोह अगि धणू ऊपाडिउं सोह ॥
मोटा मलिक तस्र्यु भडइ तीरीतीसरे रोही चडइ । मारि मोरक करि घण घाय भागतिला दो अंधा थाइ ॥
चालिउ दल मुलतानी ठाठ न गणि कवट न गणि बाट । घालि दल पातसाह तणू नदीनीर पुटवइ घणू ॥
पुरतालि धरती पड्डुडि लादि सवागज धरती चडि । गाम सीम जु जाणू बाट तु जाल्हुर बाधिउ ठाठ ॥
सरली सुडि दीपता हम्त्री तणा सगगार । कोटिउ धूघर घणघमि घंटारव टणकार ॥
माता मयगल मतगयंद सिंगल्दीप तणा सोरंग । अलतीबल आ रोगि अपार एहवा मठीआ लाप अठार ॥
तेहनी पापर तणी भत्री पयरि कनक दंतूसाल जरीआं सयरि । अगाडी नेजा गहूत सनाह रवि छायु सेन चाल्यु जाय ॥
साथियी नादि गोला चालि लइ लइ मसम्सु बाइ । गामगामना सीमा छेडि भडी मेइनी हवाइ ॥
९३ चालंतां-चालंता H. धरणी-धरती H कांपइ-कापई A D, कंपिइ B, कांपि C H J. सेप-शेप
B D K. झालइ-झालि B C H J, झीलइ I. सायर तणां-सायरना B, सायर तना K. पूर-नीर H. ऊलटीयां-
उलहुतीयां A B, इलदनीआं H, ऊल्टीआं J, ऊलटिया K. जेहवां-जेदूवा B H, जाने C D J K.
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