कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished354 पृष्ठ
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आणि वार जाल्हुरि जईनई, तेज अम्हारउं दापूं ।
कइ सोनगिरि पालटूं प्राणि, कइ अम्हे आयुध नापूं ॥ ७७
पातिसाहि जउ करी प्रतिज्ञा, नइ दीधउं फुरमाण ।
पाटण हूंतु पान तेडावउ, इम बोलइ सुरताण ॥ ७८
कासीद तेडी छडे पीआणे, पाटण भणी चलाव्यउ ।
थाणदार जउ साम्हउ आवी, सिरि फुरमाण चडाव्यउं ॥ ७९
वांचिउ लेप सजाई कीधी, तेडाव्या सोनार ।
सोना तणउं कराव्यूं मंदिर, वारू पोलि पगार ॥ ८०
घावन मण सोना तिणि लागा, पानि सरीसउ लीधउं ।
ढीली नगरि जईनई भेटइ पातिसाहनइ दीधउं ॥ ८१
७७ आणी-आंणी D H J. वार-वारि B J. जाल्हुरि-जालुरि A, जाल्हरि H, जाल्लुहरि J, जालउरइं K.
जईनई-जईइ B