कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished354 पृष्ठ
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टोले टोले पडइ करांपि, नीर प्रवाह वहइ जिम आंपि ।
एक फाडइ पहिरण संथणी, पाए नेउरी भांजइ घणी ॥ ६
एक नांपइ एकाउलि हार, एक ऊतारइ सवि सिणगार ।
ताणइ वीणि विछोडइ दोर, एक लूस्या दिसइ बंदोरे ॥ ७
एक नवि रहइ पुहर नइ घडी, एक आलोटइ आडी पडी ।
थ्यु विपवाद पान नइ फूलि, एक रोआवि मुहुगि मूलि ॥ ८
एक तणा बांधव भरतार, एक तणा फूटरा कुमार ।
जे जे हता रिणवाडला, एक तणा मारूया माउला ॥ ९
अल्लूपाननइ द्यइ सवि शाप, एक तणा रणि मारिया वाप ।
सांधविसाहणे पडीया वाट, नगर मांहि दिवराणां हाट ॥ १०
६ टोले टोले-डोले डोले A, टोले २ C H, टोलई २ D, टाले टोले J, टोलो टोले K. पडइ-पडइं A D,