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सर्वकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

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प्रथम खंड ६१
त्राट करु करि कनकमइ, सपी मोतीइडे पूरु चुक कि ॥
जीतउं० ॥ २४६
तिलक करु कुंकुम तणां, सपी तिणि रंगि राउ वधावु कि ॥
जीतउं० ॥ २४७
असुर दली घरि आवीउ, सपी शंकर छोडीउ बंध कि ॥
जीतउं० ॥ २४८
कान्हडदे जीवे घणूं, सपी वेलिइ मालदे वीर कि ॥
जीतउं० ॥ २४९
॥ चउपई ॥
सरसां संवल नइ पहिरणां, पाछां वान चलाव्यां घणां ।
अचला विप्र दीइ आसीस, कान्हड जीवउ कोडि वरीस ॥ २५०
सोमनाथ आराधइ कान्ह, नितु नितु पंचामृत स्नान ।
पूजा तणा सोल उपचार, चंदन कुसम तिलक शृंगार ॥ २५१
२४६ त्राट-प्राट K. करु करि-करि A, करूं करि B, करीय ते J, करी करि K. कनकमइ-रलीयामणउ A,
कनकमि B, कनकस्मइ ए D, कनकमि ए J, कनकमे K. सपी-सखी B,...J. मोतीइडे-मोतीडे ABDH, मोतीअडे
K. पूरु-पूरूं B, पूहं K. चुक-चउक K. जीतउं-जीतुं० A, जीतु BJ, जीतुं D,...H, जीतुं सही० K.
२४७ करु-कुरुम A, करूं B, करूं DH, कह रे J, करी K. कुंकुम-कुंकम ADE, कंकू H. तणां-तणूं B,
तणू ए J, तणा K. सपी-सखी B,...J. तिणि रंगि-तीणि रंगि A, रंगि B, येनि रंगि D, नवरंगि K. वधावु
em-बधाविउ A, वधाव BHJ, वयावि D, वधावइ K. कि-हह H. जीतउं-जीतुं० ABJ, जीतुं D,...H,
जीतउ K.
२४८ असुर-असुर H. दली-भंजी H. आवीउ-आवीया J, आविया K. सपी-सखी B,...J, शपी K.
शंकर-संकर AH, तरकश J. छोडीउ-छोडवु B, छोड्यु J, छोट्यउ K. बंध-बँदि A, वध H. जीतउं-जीतुं०
A, जीतु० B, जीतुं D, जी० J,...H, जीतु सही K.
२४९ कान्हडदे-बांहडदे AJ, काहनडदे D, काहांतटदे H. घणूं-वरस सु A, पणू H, घणू ए J, घणं K.
वेलिइ-बोलइ A, बेलनइ H, बंधव J, बोलई नई K. ii qr in B is सखी पूरजो आसाधुरी आस वि.
षीवउं-सपी नवखंडि नाम रहावीउ कि । जीतु० । A, जीतु० BJK, जीतुं D,...H.
२५० चउपई-झुपै BJ,...C, चूपई: D, सुपइ H. सरसां-सरमा J, सारसां H. संवल-संव्वल A,
सबल H, संबल J, बंतवल K. नइ-नि BCHJ, नई D. पाछां-पाछलि J, पांठा K. वान-वांद CJ,
यांन DK. विप्र-जन J. दीइ-दि H, तिहा दि J, दियइ K. कान्हड-कांहडदे A, काहानड H, कान्हरदे J.
जीवउ-जीवे BCHJK, प्रतपे D. वरीस-वरिस C. B interpolates the following line
between 250 a and 250 b : माणस तणा वर्ण अटार पसूयां तणा न जाणूं पार ।
२५१ आराधइ-आराधि BCHJ. कान्ह-कान्ह A, कर्हान B, काहांन HJ. नितु नितु-नित २
ABHE. पंचामृत-पंचामृति A, पंचामृत BCJK, पंचामृर्ते D, पंचामृत H. स्नांन-मनांन AGDK,
धरि स्नांन J, संतांन H. तणा-तणां D. उपचार-अपचार AH, रूपचार C. कुसम-कुसुम BC.
कुसम तिलक-तिलक कुंकम D, तिलक कुसुम JK. शृंगार-सियगार B, शणगार C, सगगार J, श्रृंगार K.