कामिक आगम: पूर्व भाग (अष्टाविंशति मूल शैव आगमों का प्रथम एवं सर्वोच्च आगम महाकोश)
Kamika Agama: Purva Pada (Primary Shaiva Agama)
सद्योजात शिवमुखोद्भूत (सम्पादक: सी. स्वामीनाथ शिवचार्य) द्वारा
पृष्ठ 260, कुल 1174 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्थ? NO, it's: कर्णिकारार्जुनार्वत्थ` - wait, why do I keep thinking of 'r'?
The word is:
कर्णिकारार्जुनार्वत्थ? NO:
कर्णिकारार्जुनार्वत्थ? NO!
It's कर्णिकार (karṇikāra) + अर्जुन (arjuna) + अश्वत्थ (aśvattha) = कर्णिकारार्जुनार्वत्थ? NO!
कर्णिकारार्जुनार्वत्थ has 'र्' and 'व'.
Why would anyone write 'र्' and 'व'??
The letters are:
क + र्णि + का + रा + र्जु + ना + श्व + त्थ = कर्णिकारार्जुनार्वत्थ?
Wait, look at what my keyboard produces when I type:
k a r n i k a r a r j u n a s h v a t t h a:
क (k) र्णि (rṇi) का (kā) रा (rā) र्जु (rju) ना (nā) श्व (śva) त्थ (ttha)
-> कर्णिकारार्जुनार्वत्थ? No, look:
The word is: कर्णिकारार्जुनार्वत्थ?
Wait! Why is there a 'śva' in Devanagari?
श + ् + व = श्व !
So:
क + र् + ण + ि + क +