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सर्वकोश
कल्याण: उपनिषद् अङ्क

कल्याण: उपनिषद् अङ्क

Kalyan Upanishad Ank

गीताप्रेस द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished832 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 832 में से

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पृष्ठ 9

( ७ )
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९. इन्द्रका प्रजापतिके पास पुनः आगमन और प्रश्न ... ४५६ | ४. याज्ञवल्क्य और चाक्रायण उपस्तका सवाद ... ४७८
१० स्वप्नके दृष्टान्तसे आत्माके स्वरूपका कथन ... ४५६ | ५. याज्ञवल्क्य और कहोलका सवाद, ब्रह्म और आत्माकी व्याख्या ... ४७८
११. इन्द्र एक सौ एक वर्षके ब्रह्मचर्यके बाद उपदेशके अधिकारी हुए .. ४५७ | ६. याज्ञवल्क्य और गार्गीका संवाद ... ४७९
१२. इन्द्रके प्रति प्रजापतिका उपदेश ... ४५७ | ७. याज्ञवल्क्य तथा आरुणि उद्दालकका सवाद, आत्माके स्वरूपका वर्णन .. ४७९
१३. श्याम ब्रह्मसे शबल ब्रह्मकी प्राप्तिका उपदेश ... ४५८ | ८. याज्ञवल्क्य-गार्गीका संवाद; अक्षरके नाम-से आत्मस्वरूपका वर्णन .. ४८१
१४. आकाशनामक ब्रह्मका उपदेश ... ४५८ | ९. याज्ञवल्क्य-शाकल्यका संवाद और याज्ञवल्क्यकी विजय .. ... ४८२
१५. आत्मज्ञानकी परम्परा, नियम और उसका फल ... ४५८ | ( ४ ) चतुर्थ अध्याय ... ४८६
६०-बृहदारण्यकोपनिषद् ... ... ४५९ | १. जनक-याज्ञवल्क्य-सवाद .. ४८६
( १ ) प्रथम अध्याय .. ४५९ | २. याज्ञवल्क्यका जनकको उपदेश .. ४८८
१. यज्ञकी अश्वके रूपमें कल्पना ... ४५९ | ३. याज्ञवल्क्यके द्वारा आत्माके स्वरूपका कथन ... ४८८
२. प्रलयके अनन्तर सृष्टिकी उत्पत्ति .. ४५९ | ४. कामना-नाशसे ब्रह्म-प्राप्ति ... ४९१
३. प्राण-महिमा ... ४६० | ५. याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी-सवाद • ४९४
४. ब्रह्मकी सर्वरूपता और चातुर्वर्ण्यकी सृष्टि ... ४६३ | ६. याज्ञवल्कीय काण्डकी परम्परा .. ४९५
५ अन्नकी उत्पत्ति और उपासना; मन, वाणी और प्राणके रूपमे सृष्टिका विभाग ४६५ | ( ५ ) पञ्चम अध्याय ४९७
६. नाम-रूप और कर्म ... ४६८ | १. आकाशकी ब्रह्मरूपमे उपासना ... ४९७
( २ ) द्वितीय अध्याय .. ४६९ | २. 'द द द' से दम, दान और दयाका उपदेश ... ४९७
१ गार्ग्य और अजातशत्रुका संवाद; अजात-शत्रुका गार्ग्यको आत्माका स्वरूप समझाना ४६९ | ३. हृदयकी ब्रह्मरूपसे उपासना ... ४९७
२ शिशु नामसे मध्यम प्राणकी उपासना .. ४७० | ४ सत्यकी ब्रह्मरूपसे उपासना .. ४९७
३. ब्रह्मके दो रूप ... ४७१ | ५. सत्यकी आदित्यरूपमे उपासना ... ४९८
४. याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी-संवाद; याज्ञवल्क्यका मैत्रेयीको अमृतत्वके साधनरूपमे परमात्म-तत्त्वका उपदेश ... ४७१ | ६. मनोमय पुरुषकी उपासना .. ४९८
५. मधु विद्याका उपदेश, आत्माका विविध रूपोंमें वर्णन .. ४७३ | ७. विद्युत्की ब्रह्मरूपमें उपासना .. ४९८
६. मधु विद्याकी परम्पराका वर्णन ... ४७४ | ८. वाक्की धेनुरूपमे उपासना ... ४९८
( ३ ) तृतीय अध्याय .. ४७६ | ९. अन्तरस्थ वैश्वानर अग्नि ... ४९८
१. जनकके यज्ञमें याज्ञवल्क्य और अश्वल-का संवाद ... ४७६ | १०. मरणोत्तर ऊर्ध्वगतिका वर्णन ... ४९९
२. याज्ञवल्क्य और आर्तभागका सवाद .. ४७७ | ११. व्याधिमें और मृतपुरुषके श्मशान-गमन आदिमे तपकी भावनाका फल ... ४९९
३. याज्ञवल्क्य और लाह्यायनि भुज्युका संवाद ... ४७८ | १२. अन्न एव प्राणकी ब्रह्मरूपसे उपासना ४९९
| १३. प्राणकी विविध रूपोंमें उपासना .. ४९९
| १४. गायत्री-उपासना ... ५००
| १५. अन्तसमयकी प्रार्थना ... ५०१
| ( ६ ) षष्ठ अध्याय .. • ५०२
| १. प्राणकी सर्वश्रेष्ठता .. ... ५०२