कल्याण: उपनिषद् अङ्क
Kalyan Upanishad Ank
गीताप्रेस द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 507, कुल 832 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्राह्मण ५ ] * महान्तं विभुमात्मानं मत्वा धीरो न शोचति * । ४७३
साथ अदृश्य हो जाता है; देहेन्द्रियभावसे मुक्त होनेपर इसकी
कोई विशेष सञ्ज्ञा नहीं रहती । हे मैत्रेयि ! ऐसा मैं तुझसे
कहता हूँ'—ऐसा याज्ञवल्क्यने कहा ॥ १२ ॥
उस मैत्रेयीने कहा, 'शरीरपातके अनन्तर कोई सञ्ज्ञा
नहीं रहती—ऐसा कहकर ही श्रीमान्ने मुझे मोहमें डाल दिया
है।' याज्ञवल्क्यने कहा, 'हे मैत्रेयि ! मैं मोहका उपदेश नहीं
कर रहा हूँ, अरी ! यह तो उस परमात्माका विज्ञान कराने-
के लिये पर्याप्त है' ॥ १३ ॥
जहाँ (अविद्यावस्था में) द्वैत सा होता है, वहीं अन्य
अन्यको सूँघता है, अन्य अन्यको देखता है, अन्य अन्यको
सुनता है, अन्य अन्यका अभिवादन करता है, अन्य अन्य-
का मनन करता है तथा अन्य अन्यको जानता है; किंतु जहाँ
इसके लिये सब आत्मा ही हो गया है, वहाँ किसके
द्वारा किसे सूँघे, किसके द्वारा किसे देखे, किसके द्वारा किसे
सुने, किसके द्वारा किसका अभिवादन करे, किसके द्वारा
किसका मनन करे और किसके द्वारा किसे जाने ? जिसके
द्वारा इस सबको जानता है, उसे किसके द्वारा जाने ? अरी
मैत्रेयि ! विज्ञाताको किसके द्वारा जाने ? ॥ १४ ॥
पञ्चम ब्राह्मण
मधुविद्याका उपदेश, आत्माका विविध रूपोंमें वर्णन
यह पृथिवी समस्त भूतोंका मधु है और सब भूत इस
पृथिवीके मधु हैं। इस पृथिवीमें जो यह तेजोमय अमृतमय
पुरुष है और जो यह अध्यात्मशारीर तेजोमय अमृतमय पुरुष
है, यही वह है जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे बतलाया
गया है ]। यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। ये जल
समस्त भूतोंके मधु हैं और समस्त भूत इन जलोंके मधु हैं।
इन जलोंमें जो यह तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो
यह अध्यात्म रैतस तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह
है जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे बतलाया गया है]।
यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह अग्नि समस्त
भूतोंका मधु है और समस्त भूत इस अग्निके मधु हैं। इस
अग्निमें जो यह तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो यह
अध्यात्म वाङ्मय तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह है
जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे बतलाया गया है ]।
यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह वायु समस्त
भूतोंका मधु है और समस्त भूत इस वायुके मधु हैं। इस
वायुमें जो यह तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो यह
अध्यात्मप्राणरूप तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह है जो
कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे कहा गया है]। यह अमृत
है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह आदित्य समस्त भूतोंका
मधु है तथा समस्त भूत इस आदित्यके मधु हैं। यह जो इस
आदित्यमें तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो यह अध्यात्म
चाक्षुष तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह है जो कि 'यह
आत्मा है' [ इस वाक्यसे कहा गया है ]। यह अमृत है, यह
ब्रह्म है, यह सर्व है। ये दिशाएँ समस्त भूतोंका मधु हैं तथा
समस्त भूत इन दिशाओंके मधु हैं। यह जो इन दिशाओंमें
तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो यह अध्यात्म श्रोत्रसम्बन्धी
प्रातिश्रुत्क (प्रत्येक श्रवणवेलामें रहनेवाला) तेजोमय अमृतमय
पुरुष है, यही वह है जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे
बतलाया गया है]। यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह
चन्द्रमा समस्त भूतोंका मधु है और समस्त भूत इस चन्द्रमाके
मधु हैं। यह जो इस चन्द्रमामें तेजोमय अमृतमय पुरुष है
और जो यह अध्यात्म मनःसम्बन्धी तेजोमय अमृतमय पुरुष
है, यही वह है जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे बतलाया
गया है ]। यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह विद्युत्
समस्त भूतोंका मधु है और समस्त भूत इस विद्युत्के मधु हैं।
यह जो इस विद्युत्में तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो
यह अध्यात्म तैजस तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह है
जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे बतलाया गया है ]।
यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह मेघ समस्त
भूतोंका मधु है तथा समस्त भूत इस मेघके मधु हैं। यह जो
इस मेघमें तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो यह अध्यात्म
शब्द एव स्वरसम्बन्धी तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह
है जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे बतलाया गया है ]।
यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह आकाश समस्त
भूतोंका मधु है तथा समस्त भूत इस आकाशके मधु हैं। यह
जो इस आकाशमें तेजोमय अमृतमय पुरुष है और जो यह
अध्यात्म हृदयाकाशरूप तेजोमय अमृतमय पुरुष है, यही वह
है जो कि 'यह आत्मा है' [ इस वाक्यसे बतलाया गया है ]
यह अमृत है, यह ब्रह्म है, यह सर्व है। यह धर्म समस्त
उ० अ० ६०-६१-