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सर्वकोश
कल्याण: उपनिषद् अङ्क

कल्याण: उपनिषद् अङ्क

Kalyan Upanishad Ank

गीताप्रेस द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished832 पृष्ठ

पृष्ठ 388, कुल 832 में से

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पृष्ठ 388

३६२ ⁕ महान्तं विभुमात्मानं मत्वा धीरो न शोचति ⁕
के अंश हैं। जो कोई इस प्रकार परमात्माके तत्त्वको जानता है, वह भी इसी स्थितिको प्राप्त कर लेता है। उपर्युक्त कथन परमात्मामे
एकीभावसे स्थित होकर परमात्माकी दृष्टिसे है, यह समझना चाहिये ।
॥ दशम अनुवाक समाप्त ॥ १० ॥
॥ भृगुवल्ली समाप्त ॥ ३ ॥
॥ कृष्णयजुर्वेदीय तैत्तिरीयोपनिषद् समाप्त ॥
शान्तिपाठ
ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः ।
नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्मावादिषम् । ऋतमवादिषम् ।
सत्यमवादिषम् । तन्मामावीत् । तद्वक्तारमावीत् । आवीन्माम् । आवीद्वक्तारम् ॥
ॐ शान्तिः ! शान्तिः !! शान्तिः !!!
इसका अर्थ शिक्षावल्लीके द्वादश अनुवाकमे दिया गया है।