कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
४४६ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
आरती : श्रीकाली जी की
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ।
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट करें ॥
सुन जगदम्बा कर न विलम्बा, सन्तन के भण्डार भरें ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करें ॥१॥
'बुद्धि' विधाता तू जगमाता, मेरा कारज सिद्ध करें ।
चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन पड़े ॥
जब जब भीड़ पड़े भक्तन पर, तब तब आप सहाय करें ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करें ॥२॥
'गुरु' के वार सकल जग मोहे, तरुणी रूप अनूप धरे ।
माता होकर पुत्र खिलावै, कहीं भार्या होकर भोग करें ॥
'शुक्र' सुखदाई सदा सहाई, सन्त खड़े जय कार करें ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करें ॥३॥
ब्रह्मा, विष्णु, महेश फल लिए, भेंट देन सब द्वार खड़े ।
अटल सिंहासन बैठी माता, सिर सोने का छत्र धरे ॥
वार 'शनिचर' कुमकुम वरणी, जब लुंगड़ पर हुक्म करे ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥४॥
खडग खप्पर त्रिशूल हाथ लिये, रक्तबीज को भस्म करे ।
शुम्भ निशुम्भ क्षणहि में मारे, महिषासुर को पकड़ दरे ॥
'आदित' वारी आदि भवानी, जन अपने का कष्ट हरे ।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥५॥