कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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रूप ईश्वर है, जो पुराणों का करने वाला और वेदों तथा पुराणों के
द्वारा जानने के योग्य है उस पुराण शेष के लिए मैं स्तवन करता हूँ और
अभिवादन करता हूँ । जो इस प्रकार से समस्त जगत् का विशेष रूप
से स्मरण किया करती है, जो मधुरिपु को भी मोह कर देने वाली हैं,
जिसका स्वरूप रमा है और शिवा के स्वरूप से जो भगवान् शंकर का
रमण कराया करती है माया आपके विभव को और शुभों को वितरित करे ।
श्री काली के सम्बन्ध में
मार्कण्डेय पुराण के सप्तशती खण्ड में जिन काली देवी का वर्णन
है अथवा जिनका जन्म अम्बिका के ललाट से हुआ है वे काली श्री दुर्गा
जी के स्वरूपों में से ही एक स्वरूप है तथा आद्या महाकाली से सर्वथा
भिन्न है । भगवती आद्या काली अथवा दक्षिणा काली अनादिरूपा सारे
चराचर की स्वामिनी हैं जबकि पौराणिक काली तमोगुण की स्वामिनी
हैं। दक्षिण दिशा में रहने वाला अर्थात् सूर्य का पुत्र यम काली का नाम
सुनते ही डरकर भाग जाता है तथा काली उपासकों को नरक में ले जाने
की सामर्थ्य उसमें नहीं है इसलिए श्री काली को 'दक्षिणा काली' और
'दक्षिण कालिका' भी कहा जाता है । दस महाविद्याओं में काली
सर्वप्रधान हैं । अतः इन्हें महाविद्या भी कहा जाता है । वही स्त्रीरूपी
'वामा' 'दक्षिण' पर विजय पाकर मोक्ष प्रदायिनी बनी । इसलिए उन्हें
तीनों लोकों में 'दक्षिणा' कहा जाता है ।
श्री काली की उपासना से समस्त विघ्न उसी प्रकार नष्ट हो जाते
हैं जिस प्रकार प्रज्जवलित अग्नि में सभी पतंगे भस्म हो जाते हैं ।
कालिका पुराण का पाठ करनेवाले साधक की वाणी गंगा के प्रवाह
की भाँति गद्य-पद्यमयी हो जाती है और उसके दर्शन मात्र से ही
प्रतिवादी लोग निष्प्रभ हो जाते हैं । उसके हाथ में सभी सिद्धियाँ बनी
रहती हैं इसमें संदेह नहीं है । मार्गशीर्ष मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी
कालाष्टमी होती है जो उपासक इन दिन काली की सन्निधि में उपवास
कर जागरण करते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं । सात अँगुल