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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 17, कुल 442 में से

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पृष्ठ 17

थे ऐसे छः मुनियों ने अपनी इन्द्रियों की क्रिया को निगृहीत कर लिया
था । उस समय ऋतु, वशिष्ठ, पुलस्त्य और अंगिरस के आदि चारों का
जो प्रस्वेद भूमि पर गिरा था उससे हे द्विजश्रेष्ठो ! दूसरे पितृगण
समुत्पन्न हुए थे । वह सीमय, आज्यय नाम से तथा अन्य सुकाती थी ।
वे सभी हविर्भुक् थे जो कव्य वाह प्रकीर्त्तित हुए थे । सोमष जो थे वे
ऋतु के पुत्र थे, सुकालिन वशिष्ठ मुनि के पुत्र हुए थे । जो आडयप
नामक थे, वे पुलस्त्य मुनि के पुत्र थे और हविष्मन्त अंगिरा मुनि के सुत
हुए थे ।
हे विप्रेन्द्रों ! उन अग्निष्वातादिक के उत्पन्न हो जाने पर इसके
अनन्तर लोकों के पितृ वर्गों में सब ओर कव्यवाह थे । समस्त प्राणियों
के ब्रह्माजी ही पितामह हुए थे और सन्ध्या ही पितृ प्रसूता हुई थी
क्योंकि सब उसके ही उद्देश्य से हुआ था । इसके अनन्तर भगवान्
शंकर के वचन से वह पितामह बहुत लज्जित हुए थे और शीघ्र ही
कुंठित किए हुए मुख से संयुत ब्रह्माजी कामदेव के ऊपर अत्यन्त
कुपित हो गए थे । वह कामदेव भी पहले ही उनके अभिप्राय का ज्ञान
प्राप्त करके उसने पशुपति विधि से डरे हुए ने शीघ्र ही अपने बाण को
समेट लिया था । हे द्विजेन्द्रो ! इसके अनन्तर लोगों के पितामह ब्रह्माजी
ने अत्यन्त क्रोध में आविष्ट होकर जो कुछ भी किया था उसका आप
लोग परम सावधान होकर अब श्रवण कीजिए ।
मार्कण्डेय महर्षि ने कहा- इसके उपरान्त समस्त जगतों के पति
पद्मयोनि ब्रह्माजी अत्यन्त बलवान् दाह करने वाले पावक (अग्नि)
के ही समान कोष्ठ में समाविष्ट होकर प्रज्जवलित हो गये थे और
उन्होंने ईश्वर से कहा था कि जिस कारण से आपके ही समझ कामदेव
ने पुष्यों के बाणों से मुझे सेवित किया है अर्थात् मुझे अपने कुसुम
बाणों का लक्ष्य बनाया है अतः हे हर! उसका फल अब आप प्राप्त
करिए । यह दर्प से विमोहित कामदेव आपके नेत्रों की अग्नि से निर्दग्ध
होगा । हे महादेव ! क्योंकि इसने अत्यन्त दुष्कर कर्म किया था । हे
द्विजों में परम श्रेष्ठों ! इस रीति से ब्रह्माजी ने भगवान् व्योमकेश