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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 442 में से

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पृष्ठ 15

१६ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ
कर्णों के द्वारा योजित किया था। उस समय में आलीढ़ स्थान को प्राप्त
करके तथा अपने धनुष को खींचकर धनुषधारियों में परमनिपुण
कामदेव ने यत्नपूर्वक उसे वलय के आकार वाला कर लिया था। हे
मुनि श्रेष्ठों! उस कामदेव के द्वारा कोदण्ड (धनुष को) सहित करने पर
भली-भाँति आह्लाद के उत्पन्न करने वाली सुगन्धित वायु बहने लगी
थी। इसके अनन्तर मोह कर देने वाले कामदेव ने उन घात आदि को
और सभी मनुष्यों को पृथक्-पृथक् पुष्पों के शरों से मोहित हो गए थे
और मन के द्वारा कुछ विकार को प्राप्त हो गए थे। सभी सन्ध्या को
निरीक्षण करते हुए बारम्बार विकारयुक्त मन वाले हो गये थे क्योंकि
स्त्री तो मद के वर्द्धन करने वाली होती ही है अतः सब बढ़े हुए मदन
वाले अर्थात् अधिक सकाम हो गए थे। फिर उस मदन अर्थात् कामदेव
ने पुनः सबको मोहित कराके तथा उन सबको ऐसा कर दिया था कि
वे सब इन्द्रियों के विकारों को प्राप्त हो गए थे। जिस समय में उदीरित
इन्द्रियों वाले विधाता ने उसको दीक्षा दी थी उसी समय में उनचास
भाव शरीर से समुत्पन्न हो गए थे।
हे द्विजो ! विव्वोक आदि हाव-भाव तथा चौंसठ कलायें कन्दर्प
(कामदेव) के शिरों से विंधी हुई सन्ध्या के हो गये थे। उन सबके
द्वारा देखी गई वह भी कन्दर्प के शरों के पात से समुत्पन्न कटाक्ष
आवरण आदि भावों को बारम्बार करने लगी थी। स्वाभाविक रूप से
परम सौन्दर्यशालिनी सन्ध्या मदन के द्वारा उद्भूत उन भावों को करती
हुई तनु ऊर्मियों के द्वारा स्वर्ग की नदी (गंगा) की भाँति अत्यधिक
शोभायमान हो रही थी। इसके अनन्तर भावों में समन्वित उस सन्ध्या
को देखते हुई प्रजापति धर्माम्म अर्थात् पसीने से परिपूर्ण शरीर वाले
होकर उन्होंने भी अभिलाषा की थी। तात्पर्य यह है उनके शरीर में
पसीना आ गया और उनकी भी इच्छा हुई थी। ईश्वर ने कहा-हे
ब्राह्मण ! बड़े आश्चर्य की बात है आपको यह कामभाव कैसे उत्पन्न
हो गया जो कि अपनी पुत्री को ही देखकर काम के वशीभूत हो गये
हैं। यह तो वेदों के अनुसरण करने वालों के लिए योग्य नहीं है।