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कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

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(८६)

कवीरपंथी-

ऐसे कौन ? मोर पातक हैं, जो तुम पांव पसारो । यह नहिं नई
रीति प्रभु जो एक, मोहिं अधमको तारो । युगन २ से अधम
उधारन, विदित है नाम तुम्हारो ॥ धर्मदास विनवें करजोरी, तुम
निज विरंद विचारो । मेरे अवगुन त्यागि दयानिधि, अपनी ओर
निहारो ॥ ३२ ॥

देश ताल त्योरा ।
(समय १० बजे रात्रि)

मायामोहनी मनहरन । भोगिया सब पीसंडारे योगिया
वशकरन ॥ टे० ॥ चञ्चल चाल् विशाल लोचन, सबैल शायंक
धरन । कामबान बिलोकि मारचो, रूप नाना वरन ॥ भृकुटि भेंङ्ग
प्रसङ्गै चहुँदिश, अनल लागी झरन । ज्वाल झाल कँरालमें, सब
जीव लागे जरन ॥ सुर असुर नरें नाग किञ्चर, त्रसित लागे डरन ।
मंझें धार झंकोर 'बोरे' देत नाहीं तरन ॥ काम क्रोध कठोर तृष्णा,
शोक सागर भरन । कहैं कवीर कोइ भागि बाचे, अभय सतगुरु
शरण ॥ ३३ ॥

गुरुसम और कौन ? कृपाल । परखपद परखाय मेटचो, सकल
भव भ्रम जाल ॥ टे० ॥ जरत जेहि वश सुर असुर सब, प्रबल
माया ज्वाल । वरषि अमृत ज्ञानघन प्रभु, शमन कीन्ही झाल ॥
द्रोह मोह अपार तृष्णा, धार अति विकराल । बहत जीवन पार
कीन्हो, मेटि सब जंजाल ॥ दलन दल दारुण दुसह दुख, दीनबन्धु
दयाल । चरण रज अज गुरुडध्वजहर, तिलक कीन्हो भाल ॥
ध्यान सुन्दर मृदुल मुदमय, अघहरण ततकाल । भवसमुद्र
कवीर तारण, गुरु सेतु विशाल ॥ ३४ ॥

१ पारकरो, २ प्रार्थना करते हूँ, ३ कीरती, ४ अपराध, ५ देखो, ६ चूर्ण किया, ७ गति, ८ नेत्र
९ बलवान्, १० वान, ११ प्रकार, १२ प्रहार, १३ प्रभाव, १४ वर्षा होता, १५ भयंकर, १६ राक्षस
१७ बल्ल भन्ष्य, १८ एक प्रकारके देवता, १९ बीच, २० हिलोरा देकर, २१ डुबोवे.