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सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 811

बोधसागर

( ७१ )

सादिकोबरहकहैयहकौलेलबीब । हैव्यानै आदमी सिंहरे अजीब॥
बादशाहसुनकरयहतकरीरेवजीर । होगयादामेतवहुममें असीर ॥
करकेआखिरकारतफवीजेवजीर । बादशाहघरमेंहुआरौनकपजीर॥
कह गया उससेकितूसुखतारहै । नेकवबदकाइसकेतुझपरबारहै ॥
लैकबदअहदी है इन्दुछाहबद । है नतीजा ऐ खेरदआगाहबद ॥
किजियोकुछतदवीरऐसीवजीर । तंगजिससेहोनयहमदैंफकीर ॥
घरमेंअपनेबादशाहदाखिलहुआरहगयाउसकावजीरऔरवहगदा॥

इस प्रकारसे बादशाहको समझा बुझाकर वजीरने महलमें भेज दिया । अब अह्मशाह और वजीर रह गये तब वजीरने अह्मशाहसे कहा—

उसको धमकाकर लगा कहने वजीर ।

क्या हुआ है तुझको ऐ मरद कफकीर ॥

तूजो यों गुस्ताखेकरतौहकलाम । बरमलालेताहैशहजादीकानाम॥
तुझकोहकुछअकृभी ऐ बेहया । शहजादीवहहै तूसुफलिस गदा॥
नाम शहजादीका गरतूने लिया । होगाहरहरबन्दतेराजुदा ॥
काटकर तेगोंसे मैं तेरी जुबाँ । दारपरखीचूँगा तुझको बेगुमाँ ॥
जिस्तगर चाहे तो इशतगफारकर । इसरुयालेखामसेअपने गुजर॥

वजीरकी धमकी और विश्वासघातकी बातको सुनकर अह्मशाह बहुतही दुःखी हुए और फिर अपनेको सँभालकर वजीरसे कहने लगे—

जबसुनीअह्मनेउसकीगुफतगू । बोलाऐबदअहदनासंजीदःखू ॥
भूलताहै उसखुदायपाकको । जिसने यह रुतबःदिया है खाकको॥
तूनेवहजामिनदियाथा दरम्याँ । जिससेकायमैंहजमीनोआसमाँ॥
आलिमोदामावदारायजहाँ । कादिरे मुतलक शहे शाहनशाहाँ॥

जार इबाहोमते