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सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 670

(९०)

गरुडबोध

कहै गरुड सुनो यक बानी । यहि बालककीमृत्यु नियरानी ॥
याको कोई नाहिं सहाई । याते आयो तुव शरणायी ॥
यहि बालक को कौन जो राखे । सत्य बचन हम सुखते भाखे ॥
तुम तीनों त्रिभुवनके देवा । बालक ठान्यो तुम्हरी सेवा ॥

ब्रह्मा बचन

तब ब्रह्मा बालक सों बोले । जानि प्रभुता आपन सुख खोले ॥
कहे ब्रह्मा बचन हित कारी । को तेरा बाप को है महतारी ॥
कहु बालक कहाँते आया । किन तुमको यहाँ पठाया ॥
कौन साहब दीन्हा औतारा । कौन तुझेको मारनहारा ॥

बालक बचन

तब बालक बोले अनुसारि । को है पिताको है महतारी ॥
ना जानूँ किन दिया औतारा । ना जानूँ को मारन हारा ॥
हम पूछे कोई राखहु भाई । तेहि कारन आये तुम्हरे ठाई ॥

साखी-तीनलोक के ठाकुर तुम, ब्रह्मा विष्णु महेश ।
मैं तो कछु जानो नहीं, काहि कहौं संदेश ॥

महादेव बचन

सुनो बालक मैं कहूँ बुझायी । मृत्यु तुम्हारी नियरे आयी ॥
इहाँ कौन है राखन हारा । धर्मराज तुव कीन पुकारा ॥
केहि विधि यहाँ कैसे रहिहो । कौन शब्द पुरुष पद पैहो ॥
कैसे के भवसागर तरिहो । कौन भक्ति हृदय चित धरिहो ॥
सोई भेद कहौं समुझायी । जाते तुम्हरा दुःख नशायी ॥

हंसा ( बालक ) बचन

हम तो तुम्हरी शरणे आये । जस जानो तस करो उपाये ॥
हमरी तो अब मृत्यु तुलानी । हम का जानें शब्द औ बानी ॥