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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 448

(४)

बोधसागर प्रथमभागकी अनुक्रमणिका

विषय

पृष्ठ.

अथ अमरसिंहबोधकी

अनुक्रमणिका

धर्मदास साहबका सद्गुणसे युगकमोदका |
---|---
वृत्तान्त पृष्ठना और सद्गुणका उत्तर । |
राजा अमर सिंहकी कथा आरंभ .. | ७०
कबीर साहबका अमर पुरोमें जाना और |
अमर सिंहका मिलना । और कबीर |
साहबका गुप्त हो जाना फिर राजाकी |
विकलताका वर्णन .. .. | ७१
पांच दिन पीछे फिर कबीर साहबका राजा |
अमरसिंहको मिलना .. | ७२
राजाका रानीको गुरुपदेश लेनेको कहना । |
राजा रानीकी वार्तालाप .. .. | ७२
रानीका साहबकी शरणमें आना .. |
राजाको सत्यलोक देखना .. .. | ७३
नरका वर्णन .. .. | ७७
चित्र गुप्तसे वार्तालाप .. .. | ८४
बंकुच्छका वर्णन .. .. | ८५
राजाका कबीर साहबकी आलासे चौका |
आरती करना .. .. | ८९
राजारानीका सत्यलोक जाना .. .. | ९०

इति

अथ ब्रिर्सिंहबोधकी अनुक्रमणिका

कबीर साहबका काशीमें जाना और भक्तों |
---|---
के साथ वार्तालाप करना .. .. | ९८
कबीर साहबका वेध स्वरूप देखकर बीर- |
सिंहका कबीर साहबके पास आना .. | ९९
राजाबीरसिंह और कबीर साहबकी |
वार्तालाप .. .. | १००

विषय.

पृष्ठ.

राजाका रानीसे कबीर साहबको गुस्बना- |
---|---
नेकी बात चलाना और रानीका राजा |
को नीति समझाना .. | १०३
नामदेव आदि भक्तोंका कबीर साहबकी |
ईर्षा करना और उनका समाधान .. | १०४
राजाका शिकार खेलने जाना । पानी न |
मिलनेसे व्याकुल होना और कबीर |
साहबका बाग प्रगट करके राजाका |
सेनासहित प्राण बचाना .. .. | १०५
राजाका कबीर साहबका शिष्य होना .. | ११०
राजा बीरसिंहका गुरुस्तुति करना .. | ११३
कबीर साहबका परलोकके मार्गका वृत्तान्त |
राजासे कहना .. .. | ११४
राजाका अगर नाम चौका करनेके लिये |
ब्राह्मणोंके घर वस्त्र लेने जाना उसके |
वस्त्र न देकर जगन्नाथको चढ़ाने जाना |
फिर बहोंसे दर्शन न होनेके |
कारण कबीर साहबके पास आना |
२४ अजर चौका वर्णन .. .. | ११६
कबीर साहबका मगहर में बिजुलीखों के |
घर शरीर छोड़ना और राजा बीर- |
सिंहका फौज लेकर बिजुलीखों से |
युद्धको जाना .. .. | १२०
पान देकर रानियोंको परलोक ले जानेके |
समयके मार्गका वर्णन । .. .. | १२२
नाम महात्म्य .. .. | १२५
इति |

इति