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सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1945

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कबीर चरित्रबोध

( १८६७ )

हुए भृगुमुनि साहब सातबीस । रहेरास्त दुश्मनदियाजिसनेदींस ॥
अस्त नामसाहबकहेबीसआठ । कियमदूतकोजोदियामारकाट ॥
हैं उन्तीसवीं साहबकंठ मुन । कियाकालको मारकरसो दफन ॥
हैं सन्तोष मुनिसाहब तीसवें । पयान पुरुष आवें इस अहदमें ॥
यह खुशवक्त दैरांदिखाया हमें । परमपुरुष पैगामा आया हमें ॥
जमीं सारीसतनामकी हाँकहै । तोदरकौमको सुत्तिकी झाँक है ॥
हुई सारे आलममेंयहधूमधाम।तअस्सुबत जो और भजोसत्यनाम॥
जमी सारी पर हुक्मरानी हुई । बाहर कौमपर मेहरबानी हुई ॥
यहूदी तिसार मुसलमां हिन्दू । पढ़े कमलये सत्यनामसे हुरूदा ॥
चातर्कनामसाहबकाएकतीसदौर । जमींपरनबाकीरहेयमकाजोर ॥
बत्तीसवेंबरामदहुएआदिनाम । हुएसारेनफसानीहरकतगुलाम ॥
हैं तेतीसवें वेद नामें बुजुर्ग । कि जिस सामने हो न शैता सतर्ग ॥
साहब आदिनाम हुए तीस चार । कि उसमेहसेजीवहों कामगार ॥
महानाम साहब हैं पैँतीसवाँ । जमीपरहुवा है अमन ओ अमाँ ॥
छ्तीसवें हैं निजनामसाहबखदीन । नबाकीरहेरेवकुछनफसदेन ॥
साहबदाससाहबकासैतीसअक्ष । दियबारशइनसानकेजिसने वक्ष ॥
उदयदाससाहबहों अडतीस पुश्त । इलमतिलमसबमें न कोईदुरस्त ॥
कुरदनामसाहबकानौतीसवक्त । बहरहोजहाँजिनकोहैताजोतरक्त ॥
चेहले हग मुनीसाहबनामले । तोसत्यलोककोआदमीसबचले ॥
महामुनि साहबनामचालीसएक । बदी बेखकुन आदमीसारेनेक ॥
बयालीस मुक्तामनी साहब है । आखिर जमां सत्पुरुष नायब है ॥
यह जबतक बयालीस पीढ़ी रहे । परमधामकी जगमें सीढ़ी रहे ॥
बयालीसका जबतलक नाम है । नकब्बीरका जगतमें काम है ॥
यह सद्गुरुकेसबहंस हैं जानशीं । परमपुरुषके सारशब्द अभी ॥
बयालीस जबतक रहेंगे वजीर । जहाँमें न जाहिरफिरेंफिर कबीर ॥