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सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1899

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कबीर चरित्रबोध

( १८२१ )

बुजुर्ग सब नेकी फरमावे । जोर जुल्म कुछ ताहि न भावे ॥
कहा हमारा कीजिये, छोड़ दीजिये शर ।
सुलह कुल्ह दे बैठिये, अच्छा ओर निहार ॥

शेखतकी वचन

कहे तकी सुलतान सुन, तुझे नहीं कछु दोष ।
जो मैं कहूं सो मानिये, कर मेरो सन्तोष ॥

सिकन्दर वचन

कहे सिकन्दर पीर सुन, मेरो शिर बरु लेहु ।
फकड़ कबीर न मारिये, यह माँगे मोहि देहु ॥
सुन्ते ही तकी कोथ प्रचारा । शिरसे ताज जमीपर मारा ॥
निपट विकल देखा तेहि भाई । तब हम शाहसे कहा बुझाई ॥

कबीर वचन

कहे कबीर सुनो सुलताना । करो पीरको वचन प्रमाना ॥
पीर कहै सो करो तुम, हमै नहीं कछु त्रास ।
हमहूं कहैं सत नाम बल, कहैं कबीर सुदास ॥

सिकन्दर वचन

कहै सिकन्दर सुनो जी पीग । मन मानै सो करो कबीरा ॥
डारो मार कबीरको, हम नहिं मानैं ऊन ।
ताका कबहुँ न भला हो, जो करे फक्कड़ खून ॥

शेखतकी वचन

शेखतकी तब कहे रिसाई । है कोई बाँध कबीरा भाई ॥
गंगामें डुबाया जाना

शेखतकी आपै उठै, काजी पण्डित झार ।
बाँध बाँध सब कोइ कहे, कोई न करे गोहार ॥
बाँह बाँध पग बाँधके, बोर गंगजल नीर ।