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सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1829

सुमिरनबोध

( २३ )

तिनुका तोरनेका

मनपाप मनसा पाप महापाप पाप पुरविला पाप ।
नोग्रह ब्रह्मा जाई । हम सद्गुरुके शरण आई ।
आसन वासन मन कल्पना, एतो सर्वाभूत ।
कहै कबीर सद्गुरु मिले, मिथ्याके मुख थूक ।

तिनुका तोरनेका

आसन वासन मन कल्पना, देवो सर्वाभूत ।
यमसों तिनका टूट साहब शब्द प्रगटे भागेभूतयमदूत ।
ये जीव भये कबीर साहेबके यमसों तिनका टूट ॥
कालके मुख थूक यमसों तिनका टूट ॥
शब्दहिनेहलगावैकहै कबीर धर्मदाससों कालदगामिटजाय ॥

तिनुका तोरनेका

आसन बासन मन कल्पना, खेदो सर्वा भूत ।
कहै कबीर सतगुरु मिले, मिथ्याके मुख थूक ॥

जँजीरा तिनका तोरनेका

भूतहि बांधों पिशाचहि बांधों बांधों धीमर धोखा ।
तीन निरंतर मन्तर बांधों मारों नाहर चोखा ॥
बोझा बांधों बोझइता बांधों पूजित बांधों पुजेरी बांधों ।
मरहिया मनसा बांधों हाटक बांधों फाटक बांधों ।
औघट बांधों बाट बांधों नेहर बांधों सासुर बांधों ।
अरोसिन बांधों परोसिन बांधों बांधों डंकन डोरी ।
कहै कबीर भर्म सब बांधों निर्गुन तिनका तोरी ॥

स्मरण प्रवाना पावनेका

अजरकी लिखनी हीरा पाना । सत्य सुकृत लिखे परवाना ॥
देह पान लेवो कण्ठ लगाई । बालक देहु गर्भ मैं भाई ॥