कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसुमिरनबोध
( १५ )
सच्चिदानन्द सो सदा उजागर । योग संतायनपतिसुखसागर ॥
सुर्त नामसों जपिये ज्ञानी । अमी अंकूर बीच सहिदानी ॥
प्रथम पुरुष सबहीके मूला । अमीदीप नाम है अस्थूला ॥
आलख नाम पुरुषोत्तम गाऊँ । नाम मुनींद्र सदा गोहराऊँ ॥
सर्व मई साधनपति सोई । भक्तराज बूझो नर लोई ॥
सत संतोष सो सदा सनेही । शब्दसरूपी अविचल देही ॥
प्राण नाक पिव अमृत बानी । सत्यलोकपति नाम बखानी ॥
सदगुरु जन्म निवारक जानौ । बन्दीछोर निश्चय कै मानौ ॥
अवागमनके दुःख मिटावो । चौरासी लक्ष बन्द मुक्तावो ॥
शील रूप संतोष पियारा । धर्मराय शिर मर्दन हारा ॥
मुक्तिदाता शीतल उजियारा । नाम परायण प्राण पियारा ॥
अस्थिर नाम अभयपद दाता । अक्षयराज नायक विरुध्याता ॥
सत्यसाहेब कहो बहोर बहोरी । अक्षय वृक्ष हिरामय डोरी ॥
पुढूपदीप मण्डप गुरु सांचा । हँस सोहँग नाम बिच राजा ॥
सोहँ शब्द नाम है सारा । सत्यवचन बोले कडिहारा ॥
इच्छा रूप संत जन गावै । ज्ञानहि बीज अमोल कहावै ॥
अबोल अशोच असंशय धीर । नाम एकोत्तर कहैं कबीर ॥
एकोत्तर नाम सुमिरे जो कोई । ताको आवागमन न होई ॥
नाम एकोत्तर सुमिरे जबही । सद्गुरु बैठे सिंहासन तबही ॥
आरती नाम एकोत्तर चहिये । एकोत्तर विनाननरियन गहिये ॥
आरती नाम एकोत्तर धारा । एकोत्तरी विनाकैसोकडिहारा ॥
विना एकोत्तर नहीं निस्तारा । कैसेहु निज मानो कडिहारा ॥
एकोत्तर नाम जानै विस्तारा । सो जानो सांचो कडिहारा ॥
पांच नाम इनहीमों भाषा । सहज पक्ष पालन है साषा ॥
सुर्तसहजपालजरंगश्रवणहै भाई । हँसनतिलकएकोत्तरिलेहोजाई ॥