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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1816

( १० )

बोधसागर

सुमिरन आसन करनेका

सत्त पुरुषको सुमिरिके आसन करे बनाय ।
तापर हंसा पोढई, कबीर धर्मदास सहाय ॥

सुमिरन कमर कसनेका

धर्मदास कसना कसे, नाम पान लियहाथ ।
सत्यकबीर पहुँचावहीं, सकल सन्त लिय साथ ॥

सुमिरन रस्ता चलनेका

शिरपर साहब राखिके चलिये आज्ञा माँहि ।
आगे साहेब कबीर हाँकदेत हैं, तीनलोक डरनाहिं ॥
कागकागरे विकार कूकरामंजार । नाग नाहर दूत भूत बट पार ॥
सबको बांधि कबीर आन घाट ले डार ।
घाट बाट बन औघट मोहि खसमकी आस ।
मते चले कबीरके कबहू न होय निवास ॥

सुमिरन सात शिकारीका

अमीनाम, ऊर्द्ध नाम परिमल नाम, दयावन्त, बालदीप
सहज मूल अग्रमुनि सतनाम, साहबके अमीनाम, पुष्प
सुगंधकंठकीसिलानिगम्यसुगंधयोगजीतनिहंगमित ।

इति श्री पट्टकर्म विधि नित्यकर्म सुमिरन