सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

पृष्ठ 1629, कुल 2136 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1629

श्वासगुञ्जार

( १९ )

अब तौ पुरुषप्रास नहिं मोही । गहौं बांहको राखा तोही ॥
तैं कन्या का डहकसि मोही । रचा पुरुष मम कारण तोही ॥
(तैं कामिनि कठोर निर्मोही । ) " " " " " ॥
पहिले वचन विरहते बोली । लागी कठिन कामकी गोली ॥
काम सतावै निश दिन मोही । दे पारसकी लीलहुँ तोही ॥
कामिनि कहै धर्म सुनु बाता । चढि कालिमा तोहरे गाता ॥
इठ निग्रह कामिनि किहु ताही । धर्मराय पकरी तब बाँही ॥
गही बांह कामिनिकी जबही । काम बाण घट व्यापे तबही ॥
धर्मरोष कामिनिपर कीन्हौं । गहिपगर्शासलीलतेहि लीन्हौं ॥
लीलत कामिनि शब्द उचारा । पुरुष २ करि कीन्ह पुकारा ॥
कामिनि पुरुष नामजब लीन्हौं । आज्ञा पुरुष अंशही दीन्हौं ॥
योगजीत आये तेहि वारा । सुर्त बान सो कालहि मारा ॥
पुरुष कोपि ताऊपर कीन्हा । कन्या उगलधर्मतब दीन्हौं ॥
(उगली कन्या बाहेर आई । ) " " " " " ॥
हाहाकार रोषके धावा । कामिनि पारस कहाँ चोरावा ॥
कामिनि कम्प देख विषधारा । पारस मानसरोवर डारा ॥
मानसरोवर झलतै अंगा । गयउ पताल जहाँ जलरंगा ॥
परीक्षा चार पारस परवाना । उपजी चारखान निरवाना ॥
एक परीक्षाते सरबर गयऊ । पारसके सम पारस ठयऊ ॥
दूजो अंश भयो निरवाना । शिला सिंध पर्वत परमाना ॥
रतन शिला ताहिकी धारा । सो पाजी वारे संचारा ॥
तीसर अंश नार प्रगटयऊ । अंशहि अंश चत्रगुन भयऊ ॥
चौथा अंश कामिनिअनुमाना । जाते स्वर्ग नर्क परवाना ॥
अंशहि अंश अंशते मानी । एक प्रती चौगुना उत्पानी ॥
चार २ गुण गुणहि समाना । अंशते अंश चत्र परवाना ॥