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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 124

( ८ )

अनुरागसंगर

विषया:

पृष्ठांका:

सत्यपुरुषका अद्याको मूलबौज देना२१
पुनि सहजका निरंजनके डिग जाना२१
निरंजनका अद्याको निगल जाना
और सत्यपुरुषका उसे शाप देना२२
सत्यपुरुषोंका जोगजोतजीको निरंजनके
पास उसे मानसरोवरसे निकाल
देनेकी आज्ञा देकर भंजना२३
अद्या और निरंजनका परस्पर संयोग
करना निरंजन बचन अद्याप्रति२३
भवसागरकी रचना (प्रारम्भ)२५
तोन सुतको उत्पन्न कर निरंजनका
मुक्त हो जाना२६
सिधुमयन और चौदहस्त उत्पत्ति की
कथा (प्रारम्भ)२७
प्रथमवार सिधुमयन२८
द्वितीयवार सिधुमयन२८
तृतीयवार सिधुमयन२९
पांच खानिकी उत्पत्ति२९
ब्रह्माका वेद पढ़कर निराकारका
पता पाना२९
अद्या और ब्रह्माका वातालाप२९
ब्रह्माका हठ देखकर पितादर्शनके
लिये अद्याका उसे ऊपरकी ओर
और विष्णुको नीचेकी ओर भेजना२९
विष्णुका पिताके खोजसे लांटकर
पिताके घरगतक न पहुँचनेका
बुतांत भातासे कहना और
भाताका प्रसन्न होना३२
पिनाकी खोजमें गये ब्रह्माकी कथा३२
ब्रह्माके लिये अद्याकी चिन्ता३३
गायत्री उत्पत्ति३३
गायत्रीका ब्रह्माकी खोजमें जाना३३

विषया:

पृष्ठांका:

ब्रह्माको (ध्यानसे) जगानेके लिये |
---|---
अद्याका गायत्री को युक्ति बताना | ३४
ब्रह्माका जागकर गायत्रीपर कोध |
करना | ३४
ब्रह्माका गायत्रीको झूठी साक्षी देनेके |
लिये कहना और गायत्रीका |
ब्रह्मासे रति करनेकी बात कहना | ३४
सावित्री उत्पत्तिकी कथा | ३५
ब्रह्माका गायत्री और सावित्रीके साथ |
भाताके पास पहुँचना और सबका |
शाप पाना | ३६
अद्याका ब्रह्माको शाप देना | ३७
अद्याका गायत्री को शाप देना | ३८
अद्याका सावित्रीको शाप देना | ३८
शाप देने पर अद्याका पश्चात्ताप और |
निरंजनके डरसे डरना और शाप |
पाना, निडर होना | ३९
विष्णुका गोरेसे श्याम होनेका कारण | ३९
अद्याका विष्णुकी ज्योतिका दर्शन |
करना | ४०
ज्योतिदर्शन रहस्य | ४१
मायाका विष्णुको सर्व प्रथम बनाना | ४२
अद्याका महेशको वरदान देना | ४३
शाप पानेके कारण दुःखित होकर |
ब्रह्माका विष्णुके पास जाकर |
अपना दुःख कहना और विष्णु |
का उसे आश्वासन देना | ४३
कालप्रपंच | ४३
गायत्रीका अद्याको शाप देना | ४५
जगत्की रचनाका विरोध बुतांत | ४५
चार खानिकी गिनती | ४५
जोगसी लाख योनिकी गिनती | ४६