सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 54

पण्डित जन सो विनय हमारी । भूल चूक जो कतहुँ निहारी ॥
टूटे अक्षर जहँ लिख पाई । सो सुधारिके पढ़ँ बनाई ॥
सम्बत उन्नीस सौ पैंतीसा । शुक्ला यकादशी तिथि दीसा ॥
मंगल अरु ज्येष्ठ महीना । तादिन ग्रन्थ समापति कीना ॥
मही पंजाब देशके माँही । शहर फिरोजपुर इक आही ॥
नगर मुक्तसर तहँ यक अहई । दोदा ग्राम निकट तेहि कहई ॥
ताहि ग्राममें जब आसीना । भजन ध्यान प्रभुके लौलीना ॥
ग्रन्थ रचन गुरु आज्ञा पाई । लिख रच धर्म कथा समुदाई ॥
जेते अक्षर लिखे बनाई । जो कोइ घटि बढि ताहिमिलाई ॥
सो गुरु सन्मुख लेखा भरि है । भिन्न भेद जो कोऊ करिहै ॥

इति

कबीर मन्शूर (छोटा)

इसी प्रकार सम्बत् १९३७ के आश्विन मु० सेप्टेम्बर १९८० ई. को पहला कबीरमन्शूर जिसको छोटा कबीरमन्शूरके नामसे कहा जाता है। स्वामी परमानन्दजीने समाप्त किया था। आप स्वतः लिखते हैं कि, इस किताबको आठ भाग बीस अध्यायोंमें विभाजित करके कबीरमन्शूर नाम रखा।

पहले भागके ४ अध्याय हैं। १ पहले अध्यायमें स्वसम्बेदके अनुसार जगतकी उत्पत्तिका वर्णन है। २ दूसरे अध्याय में—कालपुरुषके पंथोंका वर्णन है।

३ तीसरे अध्यायमें—कबीर साहबके पृथ्वीपर आकर अपना पंथ प्रचलित करनेका वर्णन है। ४ चौथे अध्यायमें—कबीरसाहबकी परीक्षा और अन्तर्धान होनेका वर्णन है।

दूसरे भागके सात अध्याय हैं। १ पहले अध्यायमें—कबीरसाहबके नामोंका वर्णन है। २ दूसरे अध्यायमें—कबीरसाहबके अद्वितीय होनेका वर्णन है। ३ तीसरे अध्यायमें—कबीरसाहबके पंथके शुद्ध निर्दोष होनेका वर्णन है। ४ चौथे अध्यायमें—कबीरसाहबके लोक और हंसोंका वर्णन है। ५ पांचवें अध्यायमें—कबीरसाहबकी सिद्धिशक्तिका वर्णन है। ६ छठे अध्यायमें—कबीरसाहबकी धार्मिक शिक्षाका वर्णन है। ७ सातवें अध्यायमें—कबीरसाहबके पंथके नियमोंका वर्णन है।