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सर्वकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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३८८ [ २.८.२२६
आमात्य समझ गया कि राजा ने उसीके बारे मे कहा है। उसके बाद
से उसने रणवास को दूषित करने का साहस नहीं किया। उसके सेवक ने
भी यह जानकर कि आमात्य को पता लग गया है उसके बाद से वह कर्म करने
का साहस नहीं किया।
शास्ता ने यह धर्मदेशना ला जातक का मेल बैठाया। उस समय मैं ही
बाराणसी-राजा था। वह आमात्य भी राजा ने शास्ता को कह दिया जान
तब से यह कर्म नहीं कर सका।
२२६. कोसिय जातक
“काले निक्खमणा साधु. ” यह शास्ता ने जेतवन मे विहार करते
समय कोशल नरेश के बारे में कही।
क. वर्तमान कथा
कोशल राजा प्रत्यन्त देश को शान्त करने के लिए गैर मुनासिब समय
पर निकल पड़ा। कथा उपरोक्त कथा¹ के सदृश ही है।
ख. अतीत कथा
शास्ता ने पूर्व(-जन्म) की कथा लाकर कहा—महाराज ! पूर्वकाल
मे बाराणसी नरेश ने नामुनासिब समय निकल उद्यान में पड़ाव डलवाया।
उसी समय एक उल्लू बाँसो के झुण्डो मे घुस कर छिप रहा। कौओ की
सेना ने आकर उसे घेर लिया कि निकलते ही पकडेगे। उसने सूर्यास्त तक
¹देखें कळाय मुट्ठि जातक (१७६)