जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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विषय पृष्ठ
पहला परिच्छेद १
११. परोसत वर्ग १
१०१. परोसत जातक .. .. .. .. १
[ परोसहस्स जातक (६६) के समान ही।]
१०२. पण्णिक जातक .. .. .. .. २
[ बाप ने बेटी के गदारपन की परीक्षा की।]
१०३. वेरी जातक .. .. .. .. ४
[ चोरों से बच आने पर सेठ प्रसन्न हुआ।]
१०४. मित्तविन्द जातक .. .. .. .. ६
[ मित्तविन्द जातक (८२) के समान ही।]
१०५. दुब्बललट्ठ जातक .. .. .. .. ७
[ जंगल में हवा से टूटकर बहुत सी कमजोर लकड़ी
गिरती थी। हाथी भयभीत होता था।]
१०६. उदञ्चनि जातक .. .. .. .. ९
[ बोधिसत्त्व को एक स्त्री ने लुभा लिया।]
१०७. सालित्त जातक .. .. .. .. १२
[ बहुत अधिक बोलने वाले पुरोहित के मुंह में बकरी
की मिंगणी के निशाने लगा कर कुबड़े ने उसकी अत्यधिक
बोलने की आदत छुड़ा दी।]
१०८. बाहिय जातक .. .. .. .. १५
[ स्त्री के ठीक ढंग से शौच फिरने मात्र से राजा प्रसन्न
हो गया।]