सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 21

( १९ )

अनुवाकविषयपृष्ठ
४साधनमें सहायक बौद्धिक और शारीरिक बलके लिये परमेश्वरसे अकारद्वारा प्रार्थना करनेका प्रकार तथा ऐश्वर्य-प्राप्ति आदिके लिये किये जानेवाले हवनके मन्त्रोंका उल्लेख .....३४१
५लोकों, ज्योतियों, वेदों और प्राणोंके विषयमें भूः भुवः स्वः महः—इन चार महाव्याहृतियोंके प्रयोगद्वारा उपासना करनेकी विधि और उनका पृथक्-पृथक् फल .....३४६
६परमेश्वरके हृदयाकाशमें रहनेका वर्णन तथा उन्हें प्रत्यक्ष देखनेवाले महापुरुषका क्रमशः भूः भुवः स्वः महः रूप लोकोंमें जाने और वहाँ स्वराट् बनकर प्रकृतिपर अधिकार प्राप्त कर लेनेका निरूपण एवं उन परब्रह्मका स्वरूप बतलाकर उनकी उपासनाके लिये आदेश ...३५१
७लौकिक और पारलौकिक उन्नतिके लिये पाङ्करूपसे वर्णित भौतिक और आध्यात्मिक पदार्थोंके सम्बन्ध और उपयोगका निरूपण .....३५४
८अकारकी महिमाका वर्णन .....३५७
९अध्ययनाध्यापन करनेवालोंके लिये ब्रह्म आदि शास्त्रोंक सदाचार-के पालनकी अवश्यकर्तव्यताका विधान .....३५९
१०त्रिशङ्कु त्रषिषके स्वानुभवके उद्गार बतलाकर भावनाशक्तिकी महिमाका दिग्दर्शन कराना .....३६१
११आचार्यद्वारा स्नातकको गृहस्थधर्मपालनकी महत्वपूर्ण शिक्षा .....३६२
१२उपदेशकी समाप्तिमें पुनः विभिन्न शक्तियोंके अधिष्ठातृ-देवताओंके नामसे परमेश्वरकी स्तुति-प्रार्थना करके उनकी वायुनामसे स्तुति और वन्दना .....३६८

ब्रह्मानन्दवल्ली

| शान्तिपाठ ..... | ३७१
---|---|---
१ | हृदयगुहामें छिपे हुए परमेश्वरको जाननेका फल, मनुष्यशरीरकी उत्पत्तिका प्रकार और पक्षीके रूपमें उसके अङ्गोंकी कल्पना ..... | ३७१
२ | अन्नकी महिमा तथा प्राणमय शरीर और उसके अन्तरात्माका वर्णन ... | ३७४
३ | प्राणकी महिमा तथा मनोमय शरीर और उसके अन्तरात्माका वर्णन ... | ३७७
४ | मनोमय शरीरकी महिमा तथा विज्ञानमय जीवात्माके स्वरूपका वर्णन ... | ३८१