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सर्वकोश
हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारायण पण्डित द्वारा

स्रोत: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 302 में से

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पृष्ठ 21

हितोपदेशः
भाषानुवादसमलंकृतः
꩜
प्र स्ता वि का
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादात्तस्य धूर्जटेः ।
जाह्नवीफेनलेखेव यन्मूर्ध्नि शशिनः कला ॥ १ ॥
जिन्होंके ललाटपर चन्द्रमाकी कला गंगाजीके फेनकी रेखाके समान शोभाय-
मान है उन चन्द्रशेखर महादेवजीकी कृपासे साधुजनोंका मनोरथ सिद्ध होय ॥ १ ॥
श्रुतो हितोपदेशोऽयं पाटवं संस्कृतोक्तिषु ।
वाचां सर्वत्र वैचित्र्यं नीतिविद्यां ददाति च ॥ २ ॥
यह हितोपदेश नामक ग्रंथ सुना हुआ ( सुननेसे ) संस्कृतके बोलने-चालनेमें
चतुरताको, सब विषयोंमें वाक्योंकी विचित्रताको और नीतिविद्याको देता
है ॥ २ ॥
अजरामरवत् प्राज्ञो विद्यामर्थं च चिन्तयेत् ।
गृहीत इव केशेषु मृत्युना धर्ममाचरेत् ॥ ३ ॥
बुद्धिमान् मनुष्य अपनेको कभी बूढ़ा न होऊँगा और कभी न मरूँगा ऐसा
जानकर विद्या और धनसंचय का विचार करे, मृत्युने चोटीको आ पकड़ा है
ऐसा सोच कर धर्म करे ॥ ३ ॥
सर्वद्रव्येषु विद्यैव द्रव्यमाहुरनुत्तमम् ।
अहार्यत्वादनर्घ्यत्वादक्षयत्वाच्च सर्वदा ॥ ४ ॥
पण्डित लोग सब कालमें ( कभी ) चौरादिकोंसे नहीं चुराये जानेसे, अनमोल
होनेसे और कभी क्षय न होनेसे, सब पदार्थोंमेंसे उत्तम पदार्थ विद्याकोही
कहते हैं ॥ ४ ॥