हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा
DevanagariHindipublished275 पृष्ठ
पृष्ठ 22, कुल 275 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 22
॥ श्रीहरिवंश ॥
॥ श्रीराधा वल्लभ ॥
श्रीगुरु-वन्दना
नमो० नमो जय श्रीहरिवंश।
रसिक अनन्य बेनु कुल मण्डन,
लीला मान सरोवर हंस॥
नमो जयति वृंदावन सहज माधुरी,
रास विलास प्रसंस।
आगम-निगम अगोचर राधे
चरन सरोज व्यास अवतंस॥
- दास
हितदास
श्रीइष्ट देव वन्दना
शृंगार रस माधुर्य्य सार सर्वस्व विग्रहे।
नमो नमो जगद्वन्द्ये वृन्दावन महेश्वरि॥
हे वृन्दावन की महामहिम स्वामिनि ! हे जगत् वन्दनीया! हे श्रृङ्गार, रस,
माधुरी की सार सर्वस्व मूर्ति !! आपके श्रीचरणों में बार-बार नमन है। - कृपा भिखारी
दीन हितदास