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हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary

गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा

DevanagariHindipublished275 पृष्ठ

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पृष्ठ 13

१२ • • हित चौरासी
बिधि औ निषेध छेदि डारे; प्रान प्यारे
हिये जिये निज दास निसिदिन वहै गाइयै।
सुखद चरित्र, सब रसिक बिचित्रन के
जानत प्रसिद्ध, कहा कहिकैं सुनाइयै॥
आए गृह त्यागि, राग बढ्यौ प्रिया प्रीतम सों,
बिप्र बड़भाग हरि आग्या दई हरि जानियै।
तेरी उभै सुता, ब्याहि देवौ लेवौ नाम मेरौ,
इनिकौ जौ बंस प्रसंश जग जानियै॥
ताही द्वार सेवा बिस्तार निज भक्तिनि की
अगतिन गति, सो प्रसिद्धि पहिचानियै।
मानि प्रिय बात गह गह्यौ सुख लह्यौ तब,
कह्यौ कैसें जात यह मन मन आनियै॥
राधिका बल्लभ लाल आग्या सो रसाल दई
सेवा मो प्रकास औ बिलास कुंज धाम कौ।
सौई बिस्तार सुखसार दृग रूप पियौ,
दियौ रसिकनि जिनि लियौ पक्ष बाम कौ॥
निसदिन गान रस माधुरी कौ पान उर
अंतर सिहान एक काम स्यामा स्याम कौ।
गुन सो अनूप कहि, कैसे कै सरुप कहैं
लहै मनमोद; जैसे ओर नहीं नाम कौ॥
श्रीभगवत मुदित जी गौड़िया
जै जै श्री हरिवंश हंस हित कोबिद वानी।
ललिता ललित प्रशंस केलि कल दशा बखानी॥
जयति जयति वन जयति जयति श्री राधारवनी।
जयति जयति ललितादिक जयति हित कौतिक कवनी॥