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हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary

गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा

DevanagariHindipublished275 पृष्ठ

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पृष्ठ 10

हित चौरासी • • ६
अनुपम गुणरत्नै र्निर्मितोऽसिद्विजेन्द्र।
मम हृदि तव गाथाश्चित्रलेखवेलग्ना।।
श्रीहरिलाल जी व्यास
राधैवेष्टं सम्प्रदायैककर्त्ताचार्य्यो राधा मन्त्रदः सद्गुरुश्च।
मंत्रो राधा यस्य सर्वात्मनैवं वन्दे राधापादपद्मप्रधानम्॥
श्री नाभा जी का छप्पय
श्रीराधा चरन प्रधान हृदय अति सुदृढ़ उपासी।
कुंज केलि दंपति तहाँ की करत खवासी॥
सर्बसु महा प्रसाद प्रसिद्ध ताके अधिकारी।
विधि निषेध नहिं दासि अनन्य उत्कट ब्रत धारी॥
श्रीव्यास सुवन पथ अनुसरै सोइ भले पहिचानि है।
(श्री) हरिवंश गुसाँई भजन की रीति सकृत कोउ जानि है॥
श्री स्वामी चतुर्भुजदास जी
हरिवंश चरण बिनु बल गहौं काकौ।
कुँवरि कुँवरवर केलि समागम वृन्दाविपिन सुखद धन जाकौ॥
मन क्रम वच सुमिरौं व्यासनन्दन मुरलीधरन इष्ट है जाकौ।
कृपा करैं श्रीराधा रानी छत्रभुज जानि गह्यौ यह नाकौ॥
श्री नागरीदास जी
प्यारौ श्री हरिवंश न होतौ।
तौ रसरीति समीति प्रीति कौ भेद भजन अधिकारी को तौ॥
लाड़िलीलाल विमल जस रस विनु जग अंधेर पर्यौ हुतौ सोतौ।
नागरीदास प्रभु प्रगट पुकार्यौ अविवेकिन कौं अजहूँ अछोतौ॥१॥
बिना कृपा राधा रानी की क्यौंव शरण हित तू की पावै।
जाकौ नाम सुनत परवस ह्वै श्याम सहित श्यामा उठि धावै॥
दम्पति रूप रसासव पीवत धर्मी धर्म बिनु और न भावै।
नागरीदास श्रीव्याससुवन बल नित्यबिहार औरनि दरसावै॥२॥