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सर्वकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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पृष्ठ 25

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की यह अन्तिम धमकी भी उस धर्मवीर को अपने धर्म से विचलित न कर
सकी। अन्यायियों ने लोहे के गरम चिमटे से संभाजी की आंखें निकाल
लीं, उसकी जिह्वा के टुकड़े २ कर दिये। परन्तु फिर भी वे उस शाही
शहीद को भयभीत न कर सके। अन्त में उसके पञ्चभौतिक शरीर के
टुकड़े टुकड़े कर दिये गये। इस प्रकार वह मुसलिम धर्मान्धता का शिकार
बन गये और अपने बलिदान से हिन्दुओं के लिए अमर कीर्ति प्राप्त कर
गए। अपने इस एक आत्म-बलिदान के महाकार्य से संभाजी ने महाराष्ट्र
धर्म—हिन्दु जाति के पुनरुद्धार के धर्म—की वृत्ति का जो प्रतिनिधित्व
किया वह किसी अन्य कार्य द्वारा नहीं हो सकता था। यदि वह लुटेरों का
नेता होता तो उसका कार्य निश्चित ही इसके विपरीत होता। वाह रे
संभाजी ! तुम्हारी इस धर्म-परायणता पर सौ-सौ बार धन्यवाद है। हिन्दू-
जाति तुम्हारी सदा के लिये ऋणी रहेगी। ईश्वर तुम्हारी आत्मा को
शान्ति दे और भारत के धर्माकाश में तुम्हारी कीर्ति अनन्त काल तक सूर्य
की तरह प्रकाशित रहे और हिन्दु धर्म के लिये महान् गौरवप्रद और
पथप्रदर्शक सिद्ध हो।
संभाजी के कारण, शिवाजी के द्वारा उपार्जित राज्य छिन गया,
राजकोष खाली हो गया, किले शत्रु के हाथों लुट गये और नष्ट-भ्रष्ट
किए गए और यहां तक कि उनकी राजधानी भी मुसलमानों के हाथों
में चली गयी। वह इस होनी को रोक न सका।
इस प्रकार वह अपने पिता की आजन्म की कमाई की रक्षा न
कर सका। परन्तु उस ने अपने महा बलिदान के द्वारा अपने पिता के
धार्मिक तथा अध्यात्मिक लाभों की दीप्ति और शक्ति की रक्षा ही नहीं
की अपितु वृद्धि भी की। इस प्रकार हिन्दू धर्म की स्वतन्त्रता की लड़ाई
का वृक्ष उसके रुधिर से सींचा जाकर विशेष सशक्त और हराभरा हो
गया।