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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 249, कुल 254 में से

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श्रीगांव, थाना, तारापुर, वसाई, सरंगपुर, जैतपुर, दिल्ली, दुगई, सेराई,
भूपाल, अरकाट, त्रिचनापली, फादिग्गंज, फरुखाबाद, उद्रिग, कुञ्जपुर,
पानीपत, राक्षसभुवन, उनावदी, मोतीतलाओ, धारवाड़, शुकताल,
नसीबगढ, बडगाओं, घोरघाट, बादामी, आगरा, सास्डा, इत्यादि स्थानों
में मरहठों की स्थल और समुद्र में ऐसी भारी विजय हुई कि यदि ऐसी
हमारे पुराने इतिहास में हुई होती या किसी दूसरे देश के राष्ट्र की हुई
होती तो वहां पर उन्हें स्मरण करने के लिये विजय-स्तम्भ खड़ा किया
गया होता । शिवाजी के जन्म से लेकर नाना फड़नवीस के समय तक
हरिभक्तों को कहीं पराजय नहीं हुई। ज्यों २ वे उन्नति करते गये,
छोटी २ जागीरें, जितने बड़े कि दूसरे देशों में बहुत से राज्य हैं, देते गये,
सतारा, नागपुर, कोल्हापुर, तंजोर, मांगली. मिराज, गुन्नी, बड़ौदा,
धार, इंदौर, झांसी, ग्वालियर, और भी बहुत से स्थान सूत्रों की राज-
धानियां थीं; जो कि इतने बड़े २ हैं जितने बड़े यूरोप में बहुत से राज्य हैं।
उन्होंने हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, मथुरा, डाकोर, आबु और अवन्ती, परशुराम
और प्रभास, नासिक, त्र्यम्बक, द्वारिका, जगन्नाथ, मालिकार्जुन, मदुरा,
गोकुल, गोकर्ण इत्यादि स्थानों को विदेशियों के पंजे से मुक्त किया।
काशी, प्रयाग और रामेश्वर फिर से गर्वपूर्ण से निर्भय होकर अपने कलस
उठाने के योग्य बन गये और वे मन में परमात्मा को धन्यवाद देने लगे
कि एक हिन्दू-राज्य अब भी उनके शत्रुओं से बदला लेने के लिये जीवित
है। इस हिन्दू साम्राज्य में पुराने समय के मउखरि, चालुक्य,
पल्लव, पांड्य, चोल, केराल, राष्ट्रकूट, अंध्रा, केसरी, भोज, मालवा,
हर्ष और पुलकेशिन के राज्य, राठोड़ और च्यवन आदि सभी पुराने
वंशों के राज्य सम्मिलित थे। इनके गवर्नर और सेनापति इतने बड़े २
देशों पर शासन करते थे कि पुराने समय में उतने बड़े राज्य पर शासन
करने वाले अश्वमेध यज्ञ किया करते थे। पहले और दूसरे चन्द्रगुप्त के
राज्यों को छोड़ कर कोई हिंदूराज्य इतना विशाल और विस्तृत नहीं हुआ,