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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 238, कुल 254 में से

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पृष्ठ 238

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प्रयत्न किया । यदि उन्होंने ऐसा न किया होता तो उसका अन्त हो
जाता और उसके स्थान पर अरबी या उर्दू का प्रचार हो गया होता जैसा
कि पंजाब और सिन्ध में हो गया है पर राष्ट्रीय साम्राज्य ने राष्ट्रीय
भाषा को पुनर्जीवित किया । एक विद्वान पण्डित नियुक्त किया गया
जिसने राज्यव्यवहार-कोष बनाया, जिस में प्रत्येक विदेशी मुसलमानी
भाषा के शब्द के लिए, जो कि उस समय की जनता के विचारों और
सरकारी काग़ज़ों पर छाये हुए थे, समानार्थक शब्द ढूँढ़ कर एकत्र
किये गये और साथ ही लोगों को भी विदेशी शब्दों को प्रयोग में न
लाने के लिये प्रोत्साहित किया गया ।
इस सुधार का मरहठी भाषा पर बड़ा अच्छा प्रभाव पड़ा ।
राजनैतिक पत्रों के पढ़ने से ज्ञात होता है कि विदेशी भाषा के बहिष्कार
के लिये पूर्ण परिश्रम किया गया । साहित्य, इतिहास, राजनीति, कविता
इत्यादि सब धीरे २ सुधरने लगे और अन्त में हम मोरोपन्त की महान्
कृति “महाभारत” देखते हैं, जिस में एक दर्जन भी विदेशी शब्द नहीं
पाये जाते । ‘बखर” भी कोई मध्यम श्रेणी का ग्रन्थ नहीं है । इतना
ही नहीं, बल्कि मरहठे लेखक ऐसी पुस्तकें मरहठी भाषा में लिखने लगे
जिन की भाषा अद्वितीय प्रभावशाली होती थी और लोगों के भीतर नव-
जीवन का संचार कर दिया करती थी । उस समय के राजनैतिक जीवन
ने भारत के इतिहास से और शूरवीरों के गुणों की कथा ने भाषा में
जीवन डाल दिया । एक आज यह समय आ गया है कि हम लोग बिना
वीरता के कार्य किये ही वीर रस का इतिहास लिखने बैठ जाते हैं,
यद्यपि हमें उनका ठीक अनुभव करने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ ।
केवल मराठी ही नहीं वरन् हिन्दुओं की पवित्र भाषा संस्कृत
भी मरहठों के शासनकाल में बड़ी उन्नत दशा को प्राप्त हुई । वेद, वेदाङ्ग,
शास्त्र, पुराण, ज्योतिष, वैद्यक और काव्य का भी पुनरुद्धार हुआ ।
हिन्दुओं की दर्जन से अधिक राजधानियां भारत के भिन्न २ भागों में