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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 226, कुल 254 में से

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पृष्ठ 226

[ २८ ]

उपकार उन लोगों ने हिंदू-जाति और हिंदू-धर्म के प्रति किये हैं उनके
लिये हम उनके नामों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करें और उनके कृत्यों के
लिये सदैव कृतज्ञ बने रहें; क्योंकि चन्द्रगुप्त, पुष्यमित्र, समुद्रगुप्त या
यशोधर्मन के पौरुष के कारण ही विदेशी हूण और शकों के शासन से
भारतवर्ष को मुक्ति मिली थी । महाराज शिवाजी, बाजीरावों, भाऊ,
रामदास, नाना, और जनकोजी इत्यादि शूरवीरों ने उचित साधन न
होने पर भी ऐसी शूरवीरता के कार्य किये जिनके उदाहरण भारतवर्ष के
प्राचीन इतिहास में भी बहुत ही कम पाये जाते हैं । इन लोगों ने ऐसे
समय में, जब कि विक्रमादित्य या चन्द्रगुप्त के समय से अधिक आपत्ति
के बादल हिंदू-धर्म पर मंडला रहे थे, एक विशाल साम्राज्य स्थापित
किया । क्या प्रत्येक हिंदू इनके इन कार्यों तथा उनके द्वारा स्थापित
साम्राज्य, तथा उनके जातीय गौरव और अभिमान पर ध्यान देकर, उन
महापुरुषों के प्रति श्रद्धा से पूर्ण होकर अपना सिर न झुकायेगा और
अपने उस राज्य को प्रेम की दृष्टि से न देखेगा ?
इस वैज्ञानिक युग में प्रचार आदि के अनेकों साधन रहते हुए भी
गेरीवाल्डी और मेंज़िनी जैसे नेता भी अब तक केवल धार्मिक प्रचार का
सहारा लेने के कारण सारे इटली के सङ्गठन में असमर्थ रहे । यद्यपि
इन्होंने प्रान्तीय भावों को दूर हटाकर लोगों में राष्ट्रीय भाव पैदा करने
के लिये प्राणपण से चेष्टा की तथापि उनके कुछ विरोधी खड़े हो ही गये ।
नेपोलियन और गेमन लोग इस रहस्य को न समझा कि वे
अपनी व्यक्तिगत स्वतन्त्रता को इटली के संयुक्तराज्य के हित के लिये
क्यों खो दें । जब पाइडमाएट का राजा और गेरीवाल्डी, क्रिस्पी, कैवूर
और दूसरे पीडमाएट के नेता एक प्रांत के पश्चात् दूसरे प्रान्त को विजय
करके पीडमाएट राज्य में मिला रहे थे, उस समय उन प्रान्तों
के नेता इन विजयी शूरवीरों के कार्यों और मनोरथों के जानने के लिए
नाना प्रकार के प्रश्न करते थे और उन्हें आपत्तिजनक बतलाते थे । वे