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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 254 में से

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पृष्ठ 19

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प्रति सारे भारतवर्ष के हिन्दुओं की जैसी श्रद्धा थी और उनके किये
पर जितना वे अपना गौरव समझते थे वह "छत्र-प्रकाश" नामक ...
पूर्ण ग्रन्थ के पढ़ने से स्पष्ट विदित हो जाता है, यद्यपि इसका
बुन्देलखण्ड-बासी हिन्दू था। एवं राजकवि "भूषण" ने भी महार...
शिवाजी की वीरता का वर्णन जिस ओजस्विनी कविता में किया है ...
से स्पष्ट प्रकट होता है कि उपरोक्त कविगण महाराष्ट्र के रहने वाले
होकर भी उनके चरणों में कैसी भक्ति रखते थे। इतना ही नहीं,
कवि तो महाराज शिवाजी के कर्त्तव्यों को भावपूर्ण कविता में
घूम-घूम कर हिन्दू जाति को जगाते फिरते थे और उनके हृदयों में ...
जी के प्रति यह भाव उत्पन्न करते थे कि महाराज शिवाजी हिन्दूधर्म
रक्षक हैं। इसी कारण से उनके पवित्र कर्त्तव्यों को सारे भारतवासी
श्रद्धा की दृष्टि से देखते थे। स्थानाभाव से केवल एक आध ...
उदाहरणार्थ लेखनीबद्ध की जाती है।
कासीहू की कला जाती, मथुरा मसीत होती,
शिवाजी न होतो तो, सुनति होत सबकी॥
राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यो,
स्मृति और पुराण राखे वेद-विधि सुनी मैं॥
राखी रजपूती राजधानी राखी राजन की,
धरा में धरम राख्यो, राख्यो गुन गुनी में॥
"भूषण" सुकवि जीति हद मरहट्टन की,
देश-देश कीरति बखानी तब सुनी मैं॥
साहि के सपूत सिवराज समशेर तेरी,
दिल्ली दल दारिके दिवाल राखी दुनी मैं॥
इस प्रकार हिंदू धर्म और हिंदु-पद-पादशाही के नाम पर ...
पैदा करने वाला आह्वान और युद्ध-संगीत जो महाराष्ट्रीय हुंदु...
निकला वह सह्याद्रि पर्वत की चोटी से निकल कर सारे भारतवर्ष