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सर्वकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 254 में से

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पृष्ठ 166

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करने में तत्पर हुआ जिनको छोड़ने के लिये इसका पिता विवश किया
गया था । यह महाराष्ट्र की स्वाधीनता को एक ठीकरे के मूल्य पर बेचकर
महाराष्ट्र-राज्य के नाश का कारण हुआ ।
लेकिन जब तक नाना फड़नवीस और महादजी जीवित थे, तब
तक ऐसा नहीं हो सका था ।
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२०.
सर्व-प्रिय पेशवा—सवाई माधोराव
ꕤदैन्य दिवस आज सरले सवाई माधवराव प्रतापि कलियुगिं अवतरले ॥धृ०॥
सुन्दररुप रायाचें कुणावर नाहिं रागें भरतों ॥
कलगितुरा शिरपेंच पाचुचीं पडत होति मुखावर किरणें ॥
महोत्साह घरोघर लागले लोक करायाला ॥
परशराम प्रत्यक्ष आले जणुं छत्र धारायाला ॥
नाना और महादजी क्रमशः हिन्दू-धर्म के मस्तिष्क और तलवार
थे । वे महाशक्तिशाली राज्य का विशाल भार अपने प्रशांत कंधों पर
उठाने के लिये ही उत्पन्न हुये थे । इङ्गलैण्ड, फ्रांस, हालैण्ड और पुर्तगाल
ने राज्य-स्थापन के लिये जितने भी राजनीतिज्ञ भेजे उनमें से कोई भी
इन दोनों महापुरुषों को बल और बुद्धि में नीचा न दिखा सका । हेस्टिंग्स,
वेलजली और कार्नवालिस की उनके सामने एक भी न चली । दोनों ने
ही हिन्दू-राज्य के बढ़ते हुये वैभव को देखा था । दोनों ने ही महाराष्ट्र
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ꕤ प्रतापवान् सवाई माधोराव कलियुग में पैदा हुये तब, हमारी दरिद्रता के
दिन समाप्त हो गये यह परम-सुन्दर और शान्त स्वभाव थे । सिर पर मणि जड़ित
कलगी की ज्योति उनके मुख पर पड़ती थी । घर-घर खुशियां मनायी जाने लगीं
और लोग यह समझने लगे कि साक्षात् परशुराम राज्य सम्भालने के लिये
पैदा हुये हैं ।