हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१.
नवीन युग
"स्वधर्मराज्यवृद्धि करणें ! तुम्हीं सुपुत्र निर्माण झाला" ❀
[ शिवाजी के नाम शाह जी का पत्र ]
महाराज शिवा जी का जन्म सन् १६२७ ई० में हुआ । उन के
जन्म के कारण ही यह साल एक नये युग का प्रारंभिक काल बन गया ।
शिवा जी के जन्म से पहिले सैंकड़ों ही वीर आत्माएं, मुसलमान शत्रुओं
के आक्रमणों को रोकने के लिए तथा हिन्दू-जाति की मान रक्षा के लिए
लड़ते लड़ते अपना बलिदान दे चुकी थीं । अपने देश पर मर मिटने
वाले इन योद्धाओं की तरह, शिवा जी बड़ी वीरता से लड़ते हुए विजय-
लक्ष्मी को घर लाए । वह विजय पर विजय प्राप्त करने लगे । इस
विजय-तरंग ने सारे भारत के हिन्दुओं में नव-जीवन भर दिया । देश में
एक अपूर्व शक्ति उत्पन्न हो गई जो क्रमशः बढ़ती २ इस योग्य बन गई
कि सैंकड़ों वर्षों तक लगातार शत्रुओं पर विजय पाता रही और हिन्दू-
धर्म-ध्वजा उन्नति के उच्चतम शिखर पर लहराती रही ।
महमूद गज़नवी के आक्रमण से लेकर यवनों की विजय-लहर
इतने प्रबल वेग से बही कि उस का कोई मुक़ाबला न कर सका । यह
लहर तब तक बढ़ती गई जब तक कि सारा भारत उस में विलीन न हो
गया । शिवा जी सर्व प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने विधर्मियों की इस विजय-
लहर से अपना सिर ऊपर निकाला और इस लहर को दृढ़ता पूर्वक
संबोधित करते हुए कहा--'बस जहां तक तुम्हें चढ़ना था तुम बढ़ चुकी
अब और आगे नहीं बढ़ सकती' । शिवा जी के राजनैतिक रंगमंच पर
प्रकट होने से पहले--अर्थात् सन् १६२७ से पहले हिमालय से ले कर
❀ मेरे सुपुत्र ! तुम्हारा जन्म अपने धर्म और राज्य की वृद्धि के
लिए ही हुआ है ।